युद्ध और महंगाई ने तोड़ी कमर, क्या दिवालिया होने वाला है ईरान?
नई दिल्ली | डेस्क:
लगातार युद्ध और बढ़ती महंगाई ने ईरान की अर्थव्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। कभी समृद्ध ‘पर्शिया’ के नाम से जाना जाने वाला यह देश आज अपने सबसे कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका के प्रतिबंधों ने हालात को और भी खराब कर दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में महंगाई और बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है, जिससे आम जनता पर भारी असर पड़ रहा है। आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि अब दिवालिया होने की आशंका भी जताई जा रही है।
डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते ईंधन संकट गहरा गया है, जबकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का रणनीतिक समुद्री मार्गों पर कड़ा नियंत्रण बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य स्तर पर मजबूती दिखाने के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति अंदर से कमजोर होती जा रही है। उत्पादन और निर्यात में गिरावट के कारण सरकारी खजाना खाली होता जा रहा है और जरूरी वस्तुओं के दाम कई गुना बढ़ गए हैं।
ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत बेहद गिर गई है, जिससे लोगों की बचत का मूल्य लगभग खत्म हो गया है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण आम लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
इस आर्थिक संकट के पीछे युद्ध के दौरान हुए हमले भी एक बड़ी वजह हैं। तेल रिफाइनरियों, गैस क्षेत्रों और बैंकिंग ढांचे को नुकसान पहुंचने से देश की आय के प्रमुख स्रोत प्रभावित हुए हैं। इसके चलते बड़ी आबादी गरीबी और कुपोषण की समस्या से जूझ रही है।
बेरोजगारी में वृद्धि और महंगाई के कारण जनता में असंतोष बढ़ रहा है। हालात संभालने के लिए सेंट्रल बैंक ने बड़े मूल्य के नए नोट जारी किए हैं, लेकिन इसका खास असर नहीं दिख रहा है।
युद्ध का मानवीय असर भी गंभीर रहा है, जिसमें हजारों लोगों की जान गई और कई घायल हुए हैं। उद्योग-धंधे ठप होने से बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए हैं।
कुल मिलाकर, तेहरान आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उसे एक साथ आर्थिक संकट, जन असंतोष और युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।