रायपुर – राज्योत्सव 2026 के आखिरी दिन जेल और सुधारात्मक सेवाएं विभाग की प्रदर्शनी देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। यहां बंदियों के बनाए अचार, नमकीन, सरसों तेल और अन्य उत्पादों में लोगों ने दिलचस्पी दिखाई।
खासकर जेल में तैयार होने वाली नमकीन और अचार के बारे में लोग जानकारी लेते नजर आए। दुर्ग में तैयार होने वाली लाइट्स और उन्हें असेंबल करने के काम को भी लोगों ने देखा। कई लोगों ने इन उत्पादों की खरीदारी कहां से की जा सकती है, इसकी जानकारी भी ली।
प्रदर्शनी में बंदियों के बनाए उत्पादों के साथ उनकी कला, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियों को भी दिखाया गया था। लोगों के लिए यह जानना दिलचस्प रहा कि जेल में बंदी अलग-अलग तरह के काम सीखने के साथ उपयोगी सामान भी तैयार कर रहे हैं।

हाथकरघा का चलित मॉडल बना आकर्षण
बंदियों को दिए जा रहे व्यावसायिक प्रशिक्षण की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी में हाथकरघा का चलित मॉडल भी रखा गया था। इसके जरिए लोगों को बताया गया कि जेलों में बंदियों को अलग-अलग कामों की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि रिहाई के बाद वे अपने हुनर के आधार पर रोजगार हासिल कर सकें।

आस्था नमकीन और अचार में दिखी दिलचस्पी
इस प्रदर्शनी में ‘आस्था’ ब्रांड के नाम से तैयार नमकीन के साथ अचार, सरसों तेल, जूट के उत्पाद और अन्य सामान रखे गए थे। लोगों ने इन उत्पादों को देखा और इनके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली।
बंदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को लेकर यह भी पूछा कि इन्हें बाजार में कहां से खरीदा जा सकता है। इसके अलावा दुर्ग में लाइट्स की असेंबलिंग से जुड़े काम को भी प्रदर्शनी में जगह दी गई थी।

गणेश-दुर्गा की प्रतिमाएं और पेंटिंग भी प्रदर्शित
प्रदर्शनी में बंदियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग, जूट के सामान, भगवान गणेश और मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी रखी गई थीं। महिला बंदियों द्वारा अचार बनाने और युवा बंदियों को फास्ट फूड तैयार करने की ट्रेनिंग देने की जानकारी भी फोटो प्रदर्शनी के जरिए दी गई। ये गतिविधियां ‘निश्चय कार्यक्रम’ के तहत संचालित की जा रही हैं, जिसका उद्देश्य बंदियों को स्किल सिखाकर स्वरोजगार से जोड़ना है।
गीता के 700 श्लोक याद करने वाले बंदी की उपलब्धि भी दिखाई
इस प्रदर्शनी में जेलों में चल रही स्मार्ट क्लास और डिजिटल एजुकेशन की जानकारी भी दी गई। केंद्रीय जेल रायपुर के युवा बंदी वासुदेव चौहान की उपलब्धि भी प्रदर्शित की गई। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों के 700 श्लोक याद किए हैं। इसके अलावा खुली जेल की व्यवस्था और बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों को भी तस्वीरों के माध्यम से दिखाया गया।
