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R.O. No. 13952/23

राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राजनांदगांव जिले का खैरा गांव अब देश का पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां सभी 141 घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। गांव ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल कर एक नई मिसाल पेश की है।

141 घरों में 282 किलोवाट की सौर क्षमता

खैरा गांव की कुल आबादी 889 है। यहां प्रत्येक घर में 2 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया गया है। इस तरह गांव में कुल 282 किलोवाट सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता विकसित हुई है। खास बात यह है कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए ग्रामीणों को अपनी जेब से कोई राशि खर्च नहीं करनी पड़ी। केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी के बाद शेष लागत की व्यवस्था कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से की गई।

गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भी मिला लाभ

गांव के 141 परिवारों में से 93 परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के हितग्राही हैं। इनमें अनुसूचित जनजाति के 21 परिवार और अनुसूचित जाति के 4 परिवार भी शामिल हैं। इस पहल से समाज के अलग-अलग वर्गों के परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ने का अवसर मिला है।

महिलाओं ने निभाई जागरूकता और भागीदारी की अहम भूमिका

इस उपलब्धि के पीछे गांव की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। पीएम सूर्य सखियों ने घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को योजना की जानकारी दी और आवेदन प्रक्रिया में सहयोग किया। सुमिता साहू सहित स्थानीय महिला कार्यकर्ताओं ने जागरूकता अभियान में भूमिका निभाई। पद्मश्री फुलबासन बाई यादव के महिला समूह नेटवर्क ने भी ग्रामीणों तक योजना का संदेश पहुंचाने में सहयोग किया। बैंक शिविरों और ग्राम बैठकों के जरिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

बिजली बिल में राहत, अतिरिक्त बिजली ग्रिड को

रूफटॉप सोलर सिस्टम लगने से परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को बिजली बिल में और लाभ मिल सकता है।

दूसरे गांवों के लिए बना प्रेरणास्रोत

सरपंच भूपेंद्र यादव सहित ग्रामीणों की सहभागिता से खैरा ने सामुदायिक प्रयासों की ताकत दिखाई है। यह उपलब्धि केवल सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खैरा की यह पहल दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है कि जनभागीदारी, सरकारी योजनाओं और सामूहिक प्रयासों से स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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