रायपुर, 1 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का पहला दिन सिर्फ उत्सव और समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शाम ढलते ही पूरा आयोजन स्थल सुरों और संगीत की रंगीन दुनिया में बदल गया। तीन दिवसीय राज्योत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ी लोकगीतों से लेकर बॉलीवुड के लोकप्रिय गीतों तक का ऐसा संगम देखने को मिला कि दर्शक देर रात तक संगीत की धुनों पर झूमते रहे। बॉलीवुड गायिका पलक मुच्छल की प्रस्तुति इस शाम का प्रमुख आकर्षण रही।
अनुराग शर्मा ने छत्तीसगढ़ी गीतों से की शुरुआत
सांस्कृतिक संध्या का आगाज छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक अनुराग शर्मा ने किया। उन्होंने अपने चर्चित गीत ‘गीत कोनो गाहु तोर नाम के’ की प्रस्तुति देकर माहौल को छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया। स्थानीय लोकसंगीत की मिठास और कलाकार की आवाज ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद रिदम क्वीन बैंड ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति से कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी।
लावणी और लोकनृत्य ने दिखाई सांस्कृतिक विविधता
राज्योत्सव के मंच पर महाराष्ट्र के पारंपरिक लावणी नृत्य की प्रस्तुति ने भी खूब तालियां बटोरीं। पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध नृत्य के जरिए कलाकारों ने महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति की झलक पेश की। अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर देखने का अवसर दर्शकों के लिए खास रहा।
आरू साहू के गीतों पर झूमे दर्शक
छत्तीसगढ़ की लोकगायिका आरू साहू ने भक्तिमय गीत से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। उनकी मधुर आवाज और लोकधुनों ने दर्शकों को अपनी संस्कृति से जोड़ दिया। पूरे आयोजन स्थल पर तालियों और उत्साह का माहौल बना रहा।
पलक मुच्छल की आवाज ने शाम को बनाया यादगार
सांस्कृतिक संध्या का सबसे चर्चित आकर्षण बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका पलक मुच्छल रहीं। मंच पर पहुंचते ही दर्शकों में उत्साह दिखाई दिया। उनके लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति पर खासकर युवा दर्शक झूमते नजर आए। पलक मुच्छल की सुरीली आवाज और शानदार मंचीय अंदाज ने राज्योत्सव की पहली सांस्कृतिक शाम में चार चांद लगा दिए।
लोकसंस्कृति और आधुनिक संगीत का संगम
राज्योत्सव 2026 की पहली सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं के साथ देश के दूसरे हिस्सों की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली। लोकगायन, बैंड, पारंपरिक नृत्य और बॉलीवुड संगीत की प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों की मौजूदगी ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। राज्योत्सव का यह मंच प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का माध्यम बना।
