25 अक्टूबर को पारंपरिक रीति-रिवाजों से होगा आयोजन
ग्रामीणों के अनुसार, हाथी के बच्चे की छठी का आयोजन 25 अक्टूबर 2026 को मां काशीरानी मंदिर के नीचे गौठान, टिकरापारा में किया जाएगा। कार्यक्रम के लिए डिजिटल निमंत्रण कार्ड तैयार किया गया है, जिसे व्हाट्सएप और व्यक्तिगत रूप से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीण ढोल-मांदर और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं। महिलाओं ने भी सजावट और फूलों की मालाओं की व्यवस्था शुरू कर दी है।
आसपास के गांवों और अधिकारियों को न्योता
इस आयोजन को लेकर ग्रामीणों ने आसपास के हाथी प्रभावित गांवों में पारंपरिक ‘झारा-झारा’ के जरिए निमंत्रण पहुंचाया है। जिला प्रशासन, वन विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। ग्रामीणों का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश देना है कि इंसानों और हाथियों के बीच टकराव कम करने के लिए आपसी समझ और सह-अस्तित्व जरूरी है।
11 हाथियों का दल जंगल में मौजूद
ग्राम साजापानी के निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता बोधन चौहान ने टीआरपी न्यूज को बताया कि क्षेत्र के पास जंगल में 11 हाथियों का दल काफी समय से मौजूद है। उनके अनुसार, हाल ही में हाथियों के खेतों तक पहुंचने से मामूली नुकसान हुआ है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि नुकसान की भरपाई वन विभाग के नियमों के अनुसार की जाएगी। क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए ग्रामीणों और वन विभाग के बीच समन्वय महत्वपूर्ण बना हुआ है।
नवजात हाथी का वीडियो भी हुआ था वायरल
साजापानी के जंगल में जन्मे हाथी के शावक का ड्रोन वीडियो पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में दूसरे हाथी नवजात शावक को घेरे हुए दिखाई दिए थे। इस दृश्य ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और अब ग्रामीणों की ओर से छठी मनाने की पहल भी चर्चा में है। हालांकि, हाथियों के करीब जाने या उन्हें भोजन देने के दौरान वन विभाग के दिशा-निर्देशों और सुरक्षित दूरी का पालन करना जरूरी है।
‘हाथी बचाओ, जंगल बचाओ’ का संदेश
आयोजन के निमंत्रण कार्ड पर संदेश दिया गया है—“हाथी हमारे वन की शान है, इनकी रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है” और “हाथी बचाओ, जंगल बचाओ, धरती बचाओ।” ग्रामीणों ने वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। यह पहल क्षेत्र में मानव-हाथी सह-अस्तित्व को लेकर सकारात्मक संदेश देती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों को प्रसाद या फल खिलाने के लिए उनके पास जाना सुरक्षित नहीं है; ऐसे किसी भी प्रयास में वन विभाग की अनुमति और निगरानी जरूरी है।
