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R.O. No. 13952/23
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  रायपुर –  छत्तीसगढ़ में वसीयत, पारिवारिक बंटवारा, हक त्याग और गिफ्ट डीड का पंजीयन कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पहले संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर पंजीयन शुल्क देना पड़ता था।

इस वजह से कई परिवार आपसी सहमति या नोटरी के जरिए ही संपत्ति का बंटवारा कर लेते थे। लेकिन राज्य सरकार ने ऐसे दस्तावेजों का पंजीयन शुल्क घटाकर महज 500 रुपए कर दिया है। इसका असर यह हुआ कि जनवरी 2025 से 12 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश में 37,842 पंजीयन हो चुके हैं। पहले सालभर में ऐसे पंजीयन की संख्या 10 हजार तक भी नहीं पहुंचती थी। यानी पंजीयन करीब दोगुने तक पहुंच गए हैं।

खास बात यह है कि इस अवधि में सरकार को इन पंजीयन से 43 करोड़ 69 लाख 75 हजार 728 रुपए का राजस्व भी मिला है। इसमें पंजीयन शुल्क के 1.89 करोड़ रुपए के अलावा स्टांप शुल्क, अन्य दस्तावेजों का शुल्क या अन्य राशि भी शामिल है।

रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े जिलों के साथ बस्तर, कांकेर और जशपुर जैसे जिलों में भी लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है। दरअसल, पहले संपत्ति की कीमत अधिक होने पर पंजीयन शुल्क भी उसी अनुपात में बढ़ जाता था। इससे खासकर किसानों और संयुक्त परिवारों को परेशानी होती थी।

 

कई परिवार आपस में जमीन का बंटवारा तो कर लेते थे, लेकिन ज्यादा खर्च के कारण उसका विधिवत पंजीयन नहीं कराते थे। इससे राजस्व रिकॉर्ड में संपत्ति संयुक्त रूप से दर्ज रहती थी। बाद में जमीन की बिक्री, बैंक से कर्ज लेने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत आती थी। कई बार यही संपत्तियां पारिवारिक और कानूनी विवादों में भी फंस जाती थीं।

 

फायदा उठाने रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंच रहे लोग

रायपुर के जवाहर नगर निवासी उमंग सोनी ने बताया कि उनके पिता रवि सोनी ने उन्हें मकान दान में दिया था। पहले इसकी रजिस्ट्री कराने पर 73,632 रुपए शुल्क देना पड़ता। ज्यादा खर्च के कारण उन्होंने पंजीयन नहीं कराया था। अब 500 रुपए शुल्क में रजिस्ट्री होने से उन्हें 73,132 रुपए की बचत हुई। रायपुर जिले के पंजीयन दफ्तरों में ऐसे तमाम लोग हैं, जो कम पंजीयन शुल्क का फायदा उठा रहे हैं।

एक करोड़ की संपत्ति पर पहले 80 हजार, अब सिर्फ 500 रुपए पंजीयन शुल्क

 

पहले वसीयत, पारिवारिक दान, हक त्याग और बंटवारे के दस्तावेजों का पंजीयन कराने पर संपत्ति के बाजार मूल्य का 0.8% शुल्क लगता था। यानी किसी संपत्ति का बाजार मूल्य एक करोड़ रुपए होने पर केवल पंजीयन शुल्क के रूप में 80 हजार रुपए चुकाने पड़ते थे। संपत्ति की कीमत बढ़ने के साथ यह खर्च भी बढ़ता था। अब पात्र दस्तावेजों के पंजीयन के लिए 500 रुपए का शुल्क तय किया गया है। इससे एक करोड़ रुपए की संपत्ति के उदाहरण में पंजीयन शुल्क पर 79,500 रुपए की बचत होती है।

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