रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर किसानों के लिए राहत भरी व्यवस्था सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की नई धान उपार्जन नीति में छोटे किसानों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। इस बार प्रतिदिन जारी होने वाले धान खरीदी के टोकन में 70 प्रतिशत टोकन छोटे किसानों और 30 प्रतिशत टोकन बड़े किसानों के लिए निर्धारित करने का प्रावधान बताया गया है। इससे छोटे किसानों को टोकन मिलने और अपनी उपज बेचने का अवसर प्राथमिकता से मिल सकेगा।
रोज जारी होने वाले टोकन में होगा 70:30 का अनुपात
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य छोटे किसानों को धान बेचने के लिए टोकन मिलने में प्राथमिकता देना है। इसके तहत रोज जितने टोकन जारी होंगे, उनमें 70 प्रतिशत छोटे किसानों के लिए और शेष 30 प्रतिशत बड़े किसानों के लिए निर्धारित होंगे। यह अनुपात प्रतिदिन जारी होने वाले टोकन पर लागू होगा, न कि कुल धान खरीदी की मात्रा पर।
छोटे किसानों को प्राथमिकता मिलने से उन्हें खरीदी केंद्रों में अपनी उपज बेचने का अवसर मिलने की उम्मीद है। इससे टोकन के लिए इंतजार और खरीदी की व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
15 नवंबर से 31 जनवरी तक होगी धान खरीदी
प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होकर 31 जनवरी 2027 तक चलेगी। राज्य सरकार ने इस सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। खरीदी की अधिकतम सीमा प्रति एकड़ 21 क्विंटल बताई गई है। वास्तविक खरीदी निर्धारित औसत उपज और लागू नियमों के अनुसार होगी।
ई-टोकन और पंजीयन जरूरी
धान बेचने के लिए किसानों को ई-टोकन लेना होगा। समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, निर्धारित खरीदी तारीख से सात दिन पहले टोकन के लिए आवेदन करना होगा। इसके साथ ही एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य बताया गया है। किसानों को अपने पंजीयन, भूमि के रकबे और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी समय रहते जांच लेनी चाहिए।
किसानों को राहत देने पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार की धान खरीदी व्यवस्था में छोटे किसानों को प्राथमिकता देने का यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रोज जारी होने वाले टोकन में उनका हिस्सा अधिक रखने से छोटे किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर प्राथमिकता से मिल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ टोकन जारी करने की प्रक्रिया, खरीदी केंद्रों की व्यवस्था और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
अब किसानों की नजरें 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी और टोकन व्यवस्था पर रहेंगी।
