रायपुर- मां से मिलने की आस में 42 साल बाद नीदरलैंड से 7200 किलोमीटर दूर रायपुर पहुंचीं सुनीता अब्दुला को पता चला कि मां जमुना दत्ता अब दुनिया में नहीं रहीं। यह सुनते ही वह फूट-फूटकर रो पड़ीं। मां से मिलने का सपना टूट गया, लेकिन छोटी बहन शर्मिला को खोजने की उम्मीद नहीं छोड़ी।
दैनिक भास्कर के प्रयास से पहली बार वीडियो कॉल पर दोनों बहनों का आमना-सामना हुआ। सुनीता की आंखों में खुशी के आंसू थे, जबकि शर्मिला के मन में वर्षों की दूरी को लेकर नाराजगी थी। शर्मिला ने जल्द मुंबई से रायपुर आकर मिलने का वादा किया।
दो दिन में मुंबई से रायपुर पहुंचेंगी शर्मिला
दैनिक भास्कर में जमुना दत्ता और शर्मिला की तलाश से जुड़ी खबर पढ़कर शर्मिला की बचपन की सहेली शमा सिद्दीकी और मुंहबोले भाई सुरजीत बनर्जी बुधवार सुबह 11 बजे भास्कर दफ्तर पहुंचे। उन्होंने बताया कि शर्मिला आठ साल पहले मां जमुना को लेकर मुंबई चली गई थीं, जहां कुछ साल पहले मां का निधन हो गया। यह सुनकर मां से मिलने आई सुनीता टूट गईं। सुरजीत ने बताया कि शर्मिला का नंबर छह महीने से बंद है और वह किसी के संपर्क में नहीं हैं।
इसके बाद सुनीता डीसीपी तारकेश्वर पटेल से मिलने पहुंचीं। इसी दौरान भास्कर को शर्मिला की जानकारी मिली। शाम को सुरजीत को डीसीपी दफ्तर बुलाया गया, जहां डीसीपी पटेल ने सुरजीत के फोन से शर्मिला से संपर्क कर सुनीता की बात कराई। वीडियो कॉल पर 42 साल बाद एक-दूसरे को देख दोनों बहनों के आंसू बह निकले। बातचीत में जहां बरसों का दर्द छलका, वहीं पुरानी शिकायतें भी सामने आईं।
शर्मिला ने बताया कि तंगहाली के कारण मां रायपुर नहीं आ सकीं, तो सुनीता ने कहा कि पिता ने कभी मां के बारे में नहीं बताया। शर्मिला ने दो दिन में मुंबई से रायपुर आकर मिलने का वादा किया है, जिसका सुनीता बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
बातचीत में छलकी बरसों की जुदाई, पिता के प्रति कड़वाहट
मैं सुनीता अब्दुला हूं, नीदरलैंड के लैंडग्राफ में बतौर सरकारी अनुवादक कार्यरत हूं और चार बच्चों की मां हूं। 42 वर्षों से दिल में मां और छोटी बहन से मिलने की आस संजोए, मैं 7,200 किलोमीटर का सफर तय कर 9 अक्टूबर को रायपुर पहुंची। रायपुर आकर मैंने फाफाडीह स्थित बंद हो चुके सेंट जेवियर स्कूल और गुढ़ियारी की गलियों में अपनी बहन शर्मिला को तलाशा, पर मायूसी मिली।
तभी मेरी तलाश की खबर ‘दैनिक भास्कर’ में प्रकाशित हुई। इसे पढ़कर शर्मिला की बचपन की सहेली सामने आई। उसने मुझे यह हृदयविदारक सच बताया कि मेरी मां जमुना दत्ता का निधन हो चुका है और बहन आठ साल पहले मुंबई जा चुकी है। मां के गुजर जाने की खबर ने मुझे तोड़ दिया। बाद में शर्मिला के भाई के जरिए 42 साल बाद हमारी वीडियो कॉल पर पहली बार बात हुई।
मुझे स्क्रीन पर देख शर्मिला ने रुंधे गले और टीस के साथ पूछा कि इतने बरसों बाद उसकी याद कैसे आई। मैंने बताया कि मुझे पिछले साल ही पिता से उसके अस्तित्व का पता चला। पिता का नाम सुनते ही वह भावुक व आक्रोशित होकर बोली कि उन्होंने कभी मां को साथ नहीं रखा।’
