छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) ने यह पोर्टल इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से तैयार किया है। नई व्यवस्था में टिन के मूल्य निर्धारण को London Metal Exchange (LME) से जोड़ा गया है। वहीं बिक्री की राशि Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से सीधे हितग्राही के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
अब टिन बेचने वालों को मिलेगा पारदर्शी भुगतान
TIN पोर्टल लागू होने के बाद टिन संग्राहकों के पंजीयन, पहचान, अयस्क की खरीदी, स्टॉक, परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी। इससे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा और भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी।
LME आधारित मूल्य व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिन की कीमतों में होने वाले बदलाव को ध्यान में रखकर भुगतान किया जा सकेगा। DBT व्यवस्था के कारण राशि सीधे संग्राहक के बैंक खाते में पहुंचेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और भुगतान में देरी रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।
QR कोड से पहचान, मोबाइल पर मिलेगा भुगतान का अपडेट
पोर्टल में डिजिटल हितग्राही पंजीयन के साथ QR Code आधारित सत्यापन, स्मार्ट कार्ड, ऑनलाइन स्टॉक मैनेजमेंट और भुगतान की स्वचालित गणना जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। संग्राहकों को SMS के जरिए टिन की बिक्री और भुगतान से संबंधित जानकारी भी मिल सकेगी।
CMDC के अधिकारियों के लिए क्रय केंद्रों से लेकर मुख्यालय तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। इससे खरीदी, स्टॉक, भुगतान और राजस्व से जुड़े आंकड़ों की निगरानी आसान होगी।
6 केंद्रों पर हो रही खरीदी, 3 और केंद्र खुलेंगे
फिलहाल CMDC बस्तर संभाग में 6 टिन क्रय केंद्रों के जरिए जनजातीय हितग्राहियों से अयस्क खरीद रहा है। दंतेवाड़ा में बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा में तोंगपाल, नामा और चिंतलनार में क्रय केंद्र संचालित हैं।
दूरस्थ क्षेत्रों के टिन संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर सुविधा देने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 3 नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे संग्राहकों को अपना टिन बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम होगी।
सैंपलिंग की प्रक्रिया भी होगी आसान
TIN पोर्टल के साथ टिन अयस्क की खरीदी और बिक्री के लिए नई SOP लागू की गई है। अब प्रत्येक क्रय केंद्र के लिए अलग सैंपलिंग व्यवस्था होगी। सैंपल की संख्या 12 से घटाकर 6 कर दी गई है और प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम किया गया है।
परीक्षण परिणाम को लेकर असहमति होने पर री-एनालिसिस की सुविधा भी रखी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मासिक विश्लेषण शुल्क 14,400 रुपये से घटाकर 7,200 रुपये किया गया है। इससे परीक्षण प्रक्रिया की लागत कम होने के साथ CMDC को सालाना करीब 10 लाख रुपये तक की संभावित बचत का अनुमान है।
दो साल में टिन संग्राहकों को करोड़ों का भुगतान
CMDC के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क की खरीदी के एवज में करीब 90.82 लाख रुपये का भुगतान किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क की खरीदी के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।
टिन कारोबार को आजीविका से जोड़ने की कोशिश
बस्तर के दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय लंबे समय से टिन अयस्क का संग्रहण करते रहे हैं। वर्ष 2013 में दंतेवाड़ा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत पांच टिन अयस्क संग्रहण सहकारी समितियों का गठन किया गया था। अब इस व्यवस्था को डिजिटल तकनीक से जोड़कर टिन संग्रहण को अधिक व्यवस्थित और स्थायी आजीविका गतिविधि बनाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि प्राकृतिक संसाधनों से होने वाला आर्थिक लाभ स्थानीय जनजातीय परिवारों तक सीधे पहुंचे। डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग एकीकरण से भुगतान व्यवस्था मजबूत होने के साथ वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।
CMDC और बैंक के बीच हुआ एमओयू
कार्यक्रम के दौरान CMDC और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू भी हुआ। समझौते के जरिए खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, टिन संग्राहकों के लिए पारदर्शी भुगतान और मूल्य संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
कुल मिलाकर TIN पोर्टल बस्तर के टिन संग्राहकों के लिए सिर्फ एक डिजिटल पोर्टल नहीं, बल्कि खरीदी और भुगतान की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की कोशिश है। LME आधारित मूल्य, DBT भुगतान और ऑनलाइन निगरानी से अब टिन संग्राहकों को अपने अयस्क की बिक्री और भुगतान की जानकारी सीधे मिल सकेगी।

