नियमों को ताक पर रखकर चल रहा CMHO कार्यालय ? आखिर CMHO डॉ. सूर्यनारायण केशरी के “सुकुमार” कब जाएंगे अपनी मूल पदस्थापना पर !

कोरबा। जिले के स्वास्थ्य विभाग में संलग्नीकरण समाप्त करने को लेकर जारी आदेश अब खुद CMHO कार्यालय की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सूर्यनारायण केशरी द्वारा 16 मार्च 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिले में सभी प्रकार के संलग्नीकरण तत्काल समाप्त किए जाएं और कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाए। लेकिन डेढ़ महीने बाद भी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार CMHO कार्यालय में अब भी कई ऐसे कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत बताए जा रहे हैं, जिनकी पदस्थापना अन्य संस्थानों और ब्लॉकों में है। इनमें डॉ. कुमार पुष्पेश, बजरंग लाल पटेल (सहायक ग्रेड-3), मुकेश प्रजापति (फार्मासिस्ट), धर्मेन्द्र गौरहा (सुपरवाइजर), रेशम कुरें (सुपरवाइजर), प्रतिमा तंवर, मो. इरफान खान (सचिवीय सहायक), अजित रात्रे तथा रीता गुप्ता सहित अन्य नाम चर्चा में हैं। आरोप है कि कागजों में इनकी पदस्थापना अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में दर्शाई गई है, लेकिन वास्तविक कार्य अब भी CMHO कार्यालय से ही लिया जा रहा है।

सबसे ज्यादा चर्चा डॉ. कुमार पुष्पेश को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि उनकी पदस्थापना करतला क्षेत्र में है, लेकिन इसके बावजूद वे अब तक CMHO कार्यालय में सक्रिय हैं। ऐसे में विभागीय कर्मचारियों के बीच सवाल गूंज रहा है कि आखिर CMHO डॉ. सूर्यनारायण केशरी के “सुकुमार” डॉ. पुष्पेश कब वास्तव में करतला जाएंगे ?

कर्मचारियों का आरोप है कि संलग्नीकरण समाप्त करने की कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों पर लागू की गई। कई कर्मचारियों को तत्काल मूल स्थानों पर भेज दिया गया, जबकि प्रभावशाली और “करीबी” माने जाने वाले लोगों को अब भी राहत मिली हुई है। इससे विभागीय निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो चुकी है कि क्या संलग्नीकरण समाप्त करने का आदेश केवल औपचारिकता था? यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो फिर कुछ लोगों को विशेष संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? आखिर जब आदेश जारी करने वाला कार्यालय ही नियमों का पालन नहीं करेगा, तो नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्ती किस आधार पर की जाएगी?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि CMHO डॉ. सूर्यनारायण केशरी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या सभी कर्मचारियों को वास्तव में उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा जाएगा या फिर स्वास्थ्य विभाग में “विशेष कृपा” और “चहेतों” का खेल यूं ही चलता रहेगा?

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