चरित्र पर कीचड़ उछालने से क्षुब्ध होकर बेटी ने की पिता की हत्या, हंसिया से किया हमला

मध्य रात्रि ढाई बजे रलिया गांव में हुई घटना

कोरबा 10 फरवरी। कभी यहां तो कभी वहां हो रही हत्या की घटनाओं ने कोरबा जिले को सूर्खियों में ला दिया है। ढेलवाडीह में एक दिन पहले पति ने पत्नी को मौत के घाट उतार दिया और पिछली रात रलिया गांव में बेटी ने धारदार हंसिया से हमला कर पिता की जान ले ली। चरित्र पर कीचड़ उछालने से क्षुब्ध होकर उसने इस घटना को अंजाम दिया। शुरुआती तौर पर लोगों के जरिए यही जानकारी पुलिस तक पहुंची है।

जानकारी के अनुसार हरदीबाजार पुलिस थाना से 5 किलोमीटर दूर रलिया के एक मोहल्ले में अशोक केंवट की जान लेने का काम 25 वर्षीय बेटी गीता केंवट ने किया। गीता उसकी दो बहनें और माता काफी समय से कोरबा में निवासरत हैं। ये सभी मृतक के व्यवहार और शारीरिक व मानसिक प्रताडना से दुखी बताए गए। आसपास के लोगों को इसकी जानकारी है, इस तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ मौकों पर हुई घटनाओं की जानकारी लोगों को है। हालांकि किसी ने भी इस बारे में हस्तक्षेप की कोशिश नहीं की, क्योंकि वे अशोक के व्यवहार से वाकिफ थे।

हरदीबाजार टीआई प्रमोद डडसेना ने बताया कि हत्या की यह वारदात गत रात्रि अशोक के घर पर हुई। मानसिक रूप से अस्वस्थ उसकी बेटी गीता केंवट ने इस कारनामे को अंजाम दिया। वह किस तरह से इतनी रात को यहां पहुंची, इस बारे में अधिकृत जानकारी नहीं हो सकी है। जो कुछ पता चला उसके आधार पर हंसिया से पिता पर हमला करने के निशान यहां देखे गए। आज सुबह इस घटना की खबर आसपास में फैली, जिसके बाद स्थानीय लोग हरकत में आए। उनके द्वारा पुलिस को अवगत कराया गया। निरीक्षक ने बताया कि फिलहाल मामले में मर्ग और अपराध दर्ज करने के साथ शव का पंचनामा किया गया। अशोक के परिजनों सहित आसपास के लोगों से औपचारिक जानकारी ली गई। फोरेंसिक एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड की मदद भी इस मामले में ली गई। घटना को अंजाम देने वाली 25 वर्षीय युवती को फौरी तौर पर हिरासत में लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक घटना के पीछे जो कारण बताया जा रहा है, उसके अनुसार आरोपी अपने पिता के द्वारा चरित्र पर उठाए जा रहे सवाल और आरोप से क्षुब्ध थी। स्थानीय स्त्रोतों से ज्ञात हुआ कि मृतक के द्वारा उनके बारे में कहा जा रहा था कि वे कोरबा में रहकर अनैतिक काम में लिप्त हैं। कुछ दिनों पहले पिता की प्रताडना से परिजन वैसे ही परेशान थे। उस दौरान भी उनके द्वारा इस बात को कहा गया था कि आसपास के लोग तो इस तरह की बात करते ही हैं और अब आपके द्वारा भी इस तरह के लांछन लगाना बर्दाश्त के बाहर है। संभवतः यह बात भीतर तक चुभी और फिर यही अशोक केंवट की जिंदगी के लिए अंतिम कील साबित हुई।

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