कोरबा में बिजली संकट गहराया, दशहरा और दीपावली से पहले व्यापारी वर्ग परेशान; विपक्ष की चुप्पी पर उठे सवाल

कोरबा । कोरबा जिले में इन दिनों बिजली संकट ने विकराल रूप ले लिया है। दशहरा पर्व के दौरान जहां बाजारों में रौनक होनी चाहिए थी, वहीं व्यापारी बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से परेशान हैं। दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार की तैयारियों पर भी इस संकट का साया मंडरा रहा है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि रोज़ाना घंटों की कटौती और अनियमित आपूर्ति से उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह स्थिति त्योहारों के इस व्यस्त सीजन में भी सुधरती नजर नहीं आ रही है।

विपक्ष की भूमिका पर उठे सवाल

स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, लेकिन कोरबा में कांग्रेस की हालत फिलहाल सवालों के घेरे में है। संगठन गुटबाजी और आंतरिक खींचतान की दीमक से जर्जर होता नजर आ रहा है।

चिंता की बात यह है कि क्षेत्रीय कांग्रेस नेताओं की सक्रियता सड़कों की बजाय अखबारों के लेखों तक सीमित रह गई है। जब जनहित के मुद्दों पर विपक्ष उदासीन हो जाए, तो जनता की आवाज सरकार तक कैसे पहुंचे — यह सवाल अब कोरबा की जनता को बेचैन कर रहा है।

कोरबा की जनता को अब भी उम्मीद है कि बिजली संकट को जल्द सुलझाया जाएगा, लेकिन प्रशासन की तरफ से ठोस कदम नजर नहीं आ रहे। विपक्ष की निष्क्रियता और सत्ता पक्ष की सुस्ती के बीच यह स्पष्ट है कि जनता की समस्याएं फिलहाल राजनीतिक प्राथमिकताओं में कहीं गुम हो गई हैं।

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