लव जिहादः विशेष विवाह पर लगी रोक, युवक की भूमिका की जांच

कोरबा 27 जुलाई। कटघोरा की एक युवती को झांसे में लेने के बाद पश्चिम बंगाल के कोलकाता ले जाने और मस्जिद में कथित रूप से विवाह करने के प्रकरण को हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ पहले ही अवैध करार दे चुका है। कटघोरा के तौसिफ मेमन ने इस मामले को कोरबा में विवाह अधिकारी के समक्ष लगाया था और अनुमति की मांग की थी। लंबी प्रक्रिया और युवती के परिवार व हिंदू संगठनों की आपत्ति के बाद फिलहाल विशेष विवाह पर ब्रेक लग गया है। इसके साथ ही युवक की भूमिका की जांच करने के लिए पुलिस को निर्देशित किया गया है।

न्यायालय अपर कलेक्टर और विवाह अधिकारी जिला कोरबा की ओर से पत्र क्रमांक 9815 के माध्यम से पुलिस अधीक्षक को कहा गया है कि वह इस पूरे मामले में स्पष्ट रूप से जांच करने के साथ प्रतिवेदन उपलब्ध कराए। विशेष विवाह अधिनियम की धारा के तहत आवेदक तौसिफ मेमन ने आवेदन दिया था। इस परिप्रेक्ष्य में कटघोरा कसनिया निवासी युवती के परिजनों सहित विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने अपनी आपत्ति प्रशासन के समक्ष दर्ज कराई। इनमें अरविंद अग्रवाल, अवधेश सिंह, प्रभुचरण सिंह बिसेन, नरेश कुमार जगवानी, प्रकाशचंद जैन और मोहनलाल श्रीवास सहित अन्य संगठनों की आपत्ति मुख्य रही। अपर कलेक्टर न्यायालय की ओर से पुलिस अधीक्षक को कहा गया किअलग-अलग तिथियों में उपरोक्त व्यक्तियों से प्राप्त संबंधित पत्रों का अवलोकन किया जाए। इसमें तौसिफ मेमन के द्वारा विशेष विवाह की अनुमति को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। संबधित पत्रों के माध्यम से कहा गया है कि आवेदक रोहंगिया मुस्लिम है जो कोलकाता के रास्ते बांग्लादेश से आकर कटघोरा में निवासरत है। लव जिहाद के साथ उत्तरप्रदेश के जलालुद्दीन उर्फ झंगुर बाबा से जुड़ा हुआ है। पीडि़ता को डरा-धमका कर प्रलोभन देकर योजनाबद्ध साजिश के तहत कोलकाता पश्चिम बंगाल ले जाकर उस पर दबाव बनाया गया। जबरदस्ती सहमति प्रदान कराई गई। जिसे माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में स्वीकार किया गया। इस प्रकरण में लव जिहादी गिरोह न्यायालय और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर गजवा ए हिंद को साधकर कानूनी संरक्षण प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। उक्त विवाह आवेदन को नियमानुसार रद्दध्खारिज करने हेतु आवेदन पत्र इस न्यायालय को प्राप्त हुआ है। पुलिस अधीक्षक को इन पत्रों की छायाप्रति भेजने के साथ कहा गया है इन पत्रों के संबंध में स्पष्ट तौर पर जांच कराई जाए और न्यायालय को अविलंब रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।

इस मामले में विभिन्न संगठनों के द्वारा लगातार मांग की जा रही थी कि जिस युवती को उज्जवला केंद्र में रखा गया है उसे वहां से मुक्त कर अपने माता-पिता के संरक्षण में दिया जाए।

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