रायपुर। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) का 42वां स्थापना दिवस 12 अक्टूबर को रायपुर के रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड में मनाया जाएगा। इस मौके पर भव्य परेड होगी, जिसमें महिला दस्ता, कमांडो टीम, डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ता अपनी कार्यक्षमता दिखाएंगे।
समारोह में आरपीएफ के अधिकारियों और जवानों को उत्कृष्ट सेवा के लिए पदक देकर सम्मानित किया जाएगा। वहीं, तकनीकी प्रदर्शनी में ड्रोन, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन होगा।
समारोह में आरपीएफ की महानिदेशक सोनाली मिश्रा, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, आरपीएफ के महानिरीक्षक मुनावर खुर्शीद सहित छत्तीसगढ़ प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
परेड में दिखेगा जवानों का अनुशासन और साहस
समारोह का मुख्य आकर्षण आरपीएफ की परेड होगी। इसमें महिला दस्ता, कमांडो रैपिड एक्शन टीम (कोरास), डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ता हिस्सा लेंगे। इनके जरिए जवानों के प्रशिक्षण, अनुशासन, गश्त और विशेष परिस्थितियों में कार्रवाई करने की क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा।
डॉग स्क्वॉड प्रशिक्षित श्वानों की मदद से सुरक्षा व्यवस्था में अपनी भूमिका दिखाएगा। वहीं, कोरास कमांडो टीम विशेष परिस्थितियों में कार्रवाई के लिए अपनी तैयारी का प्रदर्शन करेगी। महिला दस्ते की भागीदारी से सुरक्षा व्यवस्था में महिला जवानों की भूमिका भी सामने आएगी।
आरपीएफ के जवान रेलवे संपत्ति की सुरक्षा, अपराधों की रोकथाम और यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराने के लिए काम करते हैं। परेड के जरिए उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को भी दिखाया जाएगा।
34 पदक और एक जीवन रक्षा पदक से होगा सम्मान
स्थापना दिवस समारोह में उत्कृष्ट काम करने वाले आरपीएफ अधिकारियों और जवानों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें विशिष्ट सेवा के लिए 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक, सराहनीय सेवा के लिए 30 पुलिस पदक और वर्ष 2024 में एक रेल यात्री की जान बचाने के लिए एक जीवन रक्षा पदक शामिल है।
ये पदक स्वतंत्रता दिवस 2025 और गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित किए गए थे। सम्मान पाने वाले अधिकारियों और जवानों ने अपनी ड्यूटी के दौरान बेहतर काम और सेवा भावना की मिसाल पेश की है। जीवन रक्षा पदक संकट के समय किसी की जान बचाने के लिए दिखाई गई तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता को सम्मानित करता है।
1957 में मिला कानूनी आधार, समय के साथ बढ़ीं जिम्मेदारियां
रेलवे सुरक्षा बल का गठन रेलवे संपत्ति और रेल व्यवस्था की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए किया गया था। रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 के तहत इसे कानूनी पहचान मिली। इसके बाद 1959 में नियमावली बनाई गई, जिससे बल के कामकाज को व्यवस्थित किया गया।
वर्ष 1962 में चीन के साथ युद्ध के दौरान रेलगाड़ियों की सुरक्षा के लिए विशेष आपातकालीन बल बनाया गया। वर्ष 1965 में इसका नाम रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) रखा गया। वर्ष 1966 में रेलवे संपत्ति पर अवैध कब्जे को रोकने के लिए कानून बनाया गया।
20 सितंबर 1985 को कानून में संशोधन के बाद आरपीएफ को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा मिला। वर्ष 2003 में किए गए बदलावों से यात्रियों और यात्री क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ी इसकी जिम्मेदारियां बढ़ीं। वर्ष 2019 में एनडीपीएस एक्ट की धारा 42 और 67 के तहत भी बल को कुछ अधिकार दिए गए।
समय के साथ आरपीएफ ने रेलवे संपत्ति की सुरक्षा के साथ यात्रियों की सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है।
ड्रोन और रोबोट से लेकर डिजिटल सिस्टम तक की झलक
समारोह में लगने वाली तकनीकी प्रदर्शनी में रेलवे सुरक्षा के लिए इस्तेमाल की जा रही आधुनिक तकनीकों को दिखाया जाएगा। इसमें ड्रोन से निगरानी और गश्त, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डिजिटल उपकरण प्रमुख आकर्षण होंगे।
प्रदर्शनी में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नाफिस) की जानकारी भी दी जाएगी। इन प्रणालियों की मदद से अपराध से जुड़ी जानकारी साझा करने और फिंगरप्रिंट के जरिए पहचान करने जैसे कामों में तकनीक के इस्तेमाल को समझाया जाएगा।
इन आधुनिक साधनों से निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। प्रदर्शनी में रेलवे सुरक्षा के लिए अपनाए जा रहे डिजिटल समाधानों और नई तकनीकों की जानकारी मिलेगी।
सुरक्षित रेल यात्रा का संकल्प दोहराएगा आरपीएफ
42वें स्थापना दिवस पर आरपीएफ अपने जवानों की सेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मानित करेगा। परेड में जवानों की कार्यक्षमता दिखाई जाएगी, जबकि तकनीकी प्रदर्शनी में सुरक्षा के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
आरपीएफ का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे संपत्ति की रक्षा और रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए बल लगातार काम कर रहा है। परंपरागत सुरक्षा व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रेलवे सुरक्षा को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
