एक साथ उठीं कई बच्चों की अर्थियां, गांव में मचा कोहराम
हादसे के बाद रामपुर श्यामचंद में शोक का माहौल है। गांव की गलियों से बच्चों की अर्थियां निकलते देख ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। किसी घर में मां अपने बच्चे को खोने के गम में रोती रही, तो कहीं पिता बेसुध नजर आए। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
इस त्रासदी में सबसे ज्यादा दर्दनाक स्थिति उन परिवारों की है, जिन्होंने एक साथ अपने कई बच्चों को खो दिया। जानकारी के अनुसार, एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत हुई, जबकि दूसरे परिवार के पांच बच्चों की जान चली गई। तीसरे परिवार के एक बच्चे की भी इस हादसे में मौत हो गई।
भोज में शामिल होने जा रहे थे ग्रामीण
जानकारी के मुताबिक, रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में एक घर पर भोज का आयोजन किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए गांव के करीब 20 लोग एक छोटी और जर्जर नाव पर सवार होकर ढाब के दूसरी ओर जा रहे थे। इसी दौरान बीच पानी में नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव पर सवार लोग गहरे पानी में डूबने लगे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस दुर्घटना में 13 बच्चों की जान चली गई।
जर्जर नाव को लेकर उठे सवाल
हादसे के बाद नाव की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाव बदलने के लिए पहले आवेदन भी दिया गया था। ऐसे में यह जांच का विषय है कि जर्जर नाव का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था और यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम उपलब्ध थे। हालांकि, नाव बदलने के आवेदन और हादसे के बीच संबंध को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
पूरे इलाके में शोक, जांच के बाद सामने आएंगे तथ्य
हादसे के बाद गांव से लेकर अस्पताल तक शोक और पीड़ा का माहौल रहा। इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिन परिजनों को अपने बच्चों के लौटने का इंतजार था, उनके घरों में अब सन्नाटा पसरा है। नाव पलटने की परिस्थितियों, सुरक्षा व्यवस्था और हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं पर आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
