बालको चिमनी हादसा : बीत गया एक दशक आखिर कब मिलेगा न्याय 

कोरबा (news action editor)| : छत्तीसगढ़ के बालको चिमनी हादसा मामले के एक दशक बीतने के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पाई है. गौरतलब है कि इसे देश के सबसे बड़े औद्योगिक हादसो में एक माना जाता है. हर बीतते दिन के साथ बालको प्रबंधन अपनी जिम्मेदारियों से जी चुराता नज़र आ रहा है. 41 मजदूरो की मौत की आज दसवीं बरसी है। अपनों के गम में खोये परिवार की आर्थिक स्थिती भी बदहाल हो चुकी है लेकिन उनके साथ न तो कोई जनप्रतिनिधी खड़ा है न ही वो श्रमिक नेता जो हादसे के बाद बड़े-बड़े दावे करते नज़र आते थे.छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नगरी कोरबा के इतिहास में वो काला दिन शायद ही किसी के जेहन से भुलाया जा सकेगा. जिसकी छाप ने कोरबा को वो जख्म दिये है जिसके घाव आज तलक ताजा है! जी हाँ, हम बात कर रहे हैं बालको चिमनी हादसे की उस शाम कि जब 41 मजदूर बालको के निर्माणाधीन चिमनी के धाराशाही होने से मौत की नीद सो गये. 23 सितंबर 2009 शाम के करीब 3 बजकर 50 मिनट में बालको के 1200 मेगावाट के दो निर्माणाधीन चिमनियों में से एक चिमनी आंधी-तूफान और बारिश के बाद अचनाक जमींदोज हो गया. उस वक्त बड़ी संख्या में मजदूर हर रोज की तरह काम कर रहे थे. अचानक 248 मीटर ऊंची निर्माणाधीन चिमनी के गिरने से मजदूरों की मौत हो गई.इस ह्दय विरादक घटना ने सबको हिला कर रख दिया. फिर शुरु हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन लगभग दस दिनो तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में चिमनी के मलबे से शरीर के अलग अलग भाग निकाले गये. प्रदेश के तात्कालिक मुखिया डॉ.रमन सिंह ने घटना स्थल का निरीक्षण कर न्यायिक जांच का आदेश दिया. जस्टिस संदीप बख्शी आयोग का गठन कर आयोग को जांच कि जिम्मेदारी सौपी गई. आयोग कि सुनवाई कोरबा कलेक्टोरेट स्थित खुली अदालत में 2 फरवरी 2010 को शुरु की गई.लगभग 35 माह तक चली सुनवाई में आयोग का कार्यकाल 10 बार बढ़ा. 6 बिन्दुओं पर की गई आयोग की सुनवाई में श्रमिक नेता, तत्कालीन कलेक्टर अशोक अग्रवाल, तत्कालीन सहायक श्रम आयुक्त सत्य प्रकाश वर्मा, सेपको के प्रोजेक्ट मैनेजर वू छूनान, ठेका कंपनी जीडीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज शर्मा, तत्कालीन उप संचालक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा रज्जू भोई, बालको के प्रोजेक्ट इंचार्ज जेके मुखर्जी, तत्कालीन एसडीएम रामजी साहू और बालको के तात्कालीकन सीईओ गुंजन गुप्ता बयान दर्ज कराने आयोग के समक्ष उपस्थित हुए.चीनी ठेका कंपनी सेपको द्वारा 1200 मेगावाट चिमनी का निर्माण कराया जा रहा था. सेपको, पेटी ठेके पर भारत की जीडीसीएल नामक कंपनी को ठेके पर निर्माण का कार्य कराया रहा था. इस मामले में 17लोगों के खिलाफ अपराध बालको थाने में दर्ज कराया गया. जिसमें 12लोगो की गिरफ्तारी पुलिस ने किया. साक्ष्य से छेड़छाड़ करने के आरोप में ज्वाईट डायरेक्टर डॉ.एमएम अंसारी, जीएमआरके गोस्वामी, ग्रुप मैनेजर यूके मंडल की भी गिरफ्तारी बालको पुलिस ने की थी. इस मामले में श्रमिक नेता राजेन्द्र मिश्रा ने श्रमिक संघ की तरफ से बालको की पूरी सुनवाई में मौजूद रह कर श्रमिक संघ की तरफ से अपना बयान भी दर्ज कराया. बख्शी आयोग की सुनवाई लगातार तीन साल चलने के बाद आयोग ने रिपोर्ट को सरकार को सौंप दिया. रिपोर्ट में आरोपियों के नाम का खुलासा है लेकिन अब तक मामले में सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इधर मजदूरों के परिजनों के न्याय की आस में आंखे बुढ़ी होती जा रही है. नाम के तौर पर बालको ने मृतकों के परिजनों को 13-13 लाख रूपयें मुआवजें की राशि देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है. जबकि मृतकों के परिजनों के मुताबिक उनको 25 लाख रूपयें मुआवजा और नौकरी की बात कहीं गई थी. ।10साल बीतने के बाद भी हादसें में मरने वाले मजदूरों के परिजन न्याय का इंतजार कर रहे है जबकि दोषी खुली हवा में सांस ले रहे है. देखना होगा न्याय के मंदिर से पीडि़तों को राहत के लिये और कितना इंतजार करना होगा!

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