बालको के भारी वाहनों से सबसे ज्यादा उपयोग वाले मार्ग पर डीएमएफ से करोड़ों खर्च, पारदर्शिता और प्राथमिकता पर विवाद

कोरबा 03 मई। जिले में विकास कार्यों को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक प्राथमिकताओं और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सड़क का स्वामित्व लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पास है और जिसका सबसे अधिक उपयोग निजी कंपनी बालको के भारी वाहनों द्वारा किया जाता है, उसी सड़क के निर्माण के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

मामला ध्यानचंद चौक से परसाभाठा बाजार तक के मार्ग का है, जो लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख रास्ता बना हुआ है। इस सड़क पर सबसे ज्यादा दबाव बालको के ट्रांसपोर्ट और मटेरियल मूवमेंट का रहता है, जबकि आम लोगों का उपयोग अपेक्षाकृत कम बताया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब सड़क का मुख्य उपयोग एक निजी कंपनी कर रही है, तो उसके निर्माण और रखरखाव का खर्च सरकारी फंड से क्यों उठाया जा रहा है।

पहले बालको ने कराई थी मरम्मत
जानकारी के अनुसार करीब 12 साल पहले इसी सड़क की मरम्मत बालको द्वारा कराई गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी ने उस समय अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की थी। लेकिन अब पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ने पर पूरा खर्च डीएमएफ फंड से किया जा रहा है, जिससे नीयत और प्राथमिकता दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।

डीएमएफ के उद्देश्य से भटकाव?
डीएमएफ फंड का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएंकृजैसे सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षाकृउपलब्ध कराना है। लेकिन जब इसका उपयोग ऐसे मार्ग पर किया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ एक औद्योगिक इकाई को मिलता है, तो इसे फंड के मूल उद्देश्य से भटकाव माना जा रहा है।

प्रशासन पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस निर्णय में पारदर्शिता की कमी है। क्या सड़क के उपयोग का सही आकलन किया गया? क्या कंपनी की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश हुई? या फिर डीएमएफ फंड को आसान विकल्प मान लिया गया? ये सवाल अब चर्चा का विषय बन चुके हैं।

लोगों का कहना है कि जहां ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, वहां ऐसे कार्यों पर करोड़ों खर्च करना प्राथमिकताओं में गंभीर असंतुलन को दर्शाता है। अब देखना होगा कि इस मामले में जवाबदेही तय होती है या यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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