प्रदूषण के कारण भारतवासियों की औसत उम्र घट रही, 140 करोड़ आबादी सीधा प्रभावित

नई दिल्ली. भारत में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर से लोगों की जीवन प्रत्याशा पर गंभीर असर पड़ रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआइसी) की 2025 की नई रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण के कारण भारतवासियों की औसत उम्र 3.5 साल तक कम हो रही है।

रिपोर्ट बताती है कि भारत की 140 करोड़ आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है, जहां वार्षिक औसत कण प्रदूषण (पार्टिकुलेट पॉल्यूशन) स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइन से अधिक है।

तुलना में अधिक दर्ज किया गया

यह डब्ल्यूएचओ मानक से आठ गुना ज्यादा है। रिपोर्ट का कहना है कि इसे घटाकर स्थायी रूप से वैश्विक स्तर पर लाया जाए, तो औसतन प्रत्येक भारतीय की जीवन प्रत्याशा 3.5 साल तक बढ़ सकती है। डब्ल्यूएचओ की 2021 की वायु गुणवत्ता गाइडलाइन के अनुसार, पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सीमा 5 माइक्रोग्राम और पीएम 10 की सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

भारत में वायु गुणवत्ता

भारत का राष्ट्रीय मानक पीएम 2.5 के लिए 40 माइक्रोग्राम और पीएम 10 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। रिपोर्ट के अनुसार, देश की 46 प्रतिशत आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है, जहां वार्षिक पीएम 2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी अधिक है। यदि इसे राष्ट्रीय मानक तक लाया जाए, तो यहां के लोग औसतन 1.5 साल अधिक जी सकते हैं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

प्रदूषण व जीवन प्रत्याशा

3.5 साल औसत उम्र वायु प्रदूषण से घट रही है भारत में।

140 करोड आबादी डब्ल्यूएचओ मानक से अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहती है।

9.4 महीने औसत उम्र बढ़ सकती है सबसे स्वच्छ क्षेत्रों में भी वायु गुणवत्ता वैश्विक स्तर तक हो।

8 गुना ज्यादा भारत का पीएम 2.5 स्तर डब्ल्यूएचओ मानक से।

46% लोग राष्ट्रीय मानक से भी अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहते हैं।

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