पुनर्वास मुआवजा और बसाहट की मांग को लेकर गेवरा खदान का काम रोका नरईबोध के लोगों ने

कोरबा 19 मई। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड गेवरा प्रबंधन की दुश्वारियां में कमी नहीं आ रही है। अब नरइबोध के लोगों ने पुनर्वास मुआवजा और बसाहट की मांग को लेकर खनन संबंधी कार्यों को रुकवा दिया। स्थिति को देखते हुए दीपिका और कुसमुंडा पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा है।

जानकारी के अनुसार बंकिमोगरा क्षेत्र के एक पार्षद ने प्रभावितों के पक्ष में मोर्चा संभाला। काफी समय से इस इलाके में लोगों की समस्याएं बनी हुई है। इस क्षेत्र को कोयला कंपनी ने अपने कार्यों के लिए अधिग्रहित किया है। पहले से ही पानी का संकट लोगों को परेशान कर रहा है। भूगर्भ में खनन गतिविधियों का असर पडने से इस तरह की प्रतिकूल स्थिति पैदा हुई है और लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल भरा हो गया है। लोगों का आरोप है कि ना तो भू अर्जन के बाद सभी मामलों में मुआवजा दिया गया और ना ही रोजगार की व्यवस्था की गई। पुनर्वास का मसला लटका हुआ है। काफी समय से इन सभी समस्याओं को लेकर लोग अपनी आवाज उठाते रहे हैं। हर बार साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के साथ-साथ प्रशासन की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शन को रुकवा दिया गया। कई स्तर की बातचीत में यही हुआ कि अगली समय सीमा तक सभी समस्याएं दूर हो जाएंगे। ऐसा करते-करते साल गुजर चुका है लेकिन समस्याएं अपनी जगह पर बनी हुई है। लोगों ने प्रबंधन पर वादा खिलाफी करने और लगातार परेशान करने का आरोप लगाने के साथ अब इस क्षेत्र में कोयला खनन के लिए की जा रही प्राथमिक कार्यवाही को ब्रेक लगा दिया।

प्रदर्शन करने वालों में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और युवक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने यहां पहुंचकर न केवल नारेबाजी की बल्कि कोयला कंपनी के संसाधनों के आगे आगे ऐसी स्थिति में मैनपॉवर को दूरी बनानी पड़ी। प्रबंधन के द्वारा इस बारे में सूचना दिए जाने पर कुसमुंडा और दीपिका की पुलिस मौके पर पहुंची। सुरक्षा बल की उपस्थिति में समस्याओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच जमकर किचकिच होती रही। अबकी बार लोगों का कहना है कि वह किसी के झांसे में नहीं आने वाले हैं और नहीं वादे में। उनका कहना है कि कोयला कंपनी अपने लक्ष्य और उपभोक्ताओं की कोयला जरूरत को पूरा करने तक सीमित है। उसे विस्तारित क्षेत्र के इलाकों से कोई लेना देना नहीं है।गेवरा खदान क्षेत्र में लोगों के प्रदर्शन और कोयला उत्पादन पर पड़े प्रभाव को लेेकर गेवरा क्षेत्र के सीजीएम एस.के.मोहंती व सबएरिया मैनेजर रमेश सिंदूर से कई बार मोबाइल पर संपर्क की कोशिश की गई जो नाकाम रही।

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