जहां बनना है अंडर पास, वहां शुरू हो गया मंदिर की आड़ में निजी विकास, रातों-रात हुआ अतिक्रमण

जहां बनना है अंडर पास, वहां शुरू हो गया मंदिर की आड़ में निजी विकास, रातों-रात हुआ अतिक्रमण

कोरबा। राजस्व विभाग और नगर पालिक निगम कोरबा के अफसरों- कर्मचारियों की मेहरबानी से कोरबा में बेजा कब्जा की परम्परा पुरानी है। अब ताजा मामला संजयनगर रेलवे क्रासिंग का है, जहां रातों रात बांस की छावनी बनाकर देवताओं की मूर्ति रख दी गई है। यह वही स्थान है, जहां बेजा कब्जा का लाखों रुपयों का मुआवजा वितरण कर कलेक्टर अजित वसंत रेलवे क्रासिंग पर करीब तीस करोड़ खर्च कर अंडर पास का निर्माण कर रहे हैं।

कोरबा नगर निगम के अफसरों और पार्षदों की सांठगांठ से पूरे निगम क्षेत्र में करोड़ों रुपयों की शासकीय भूमि पर बेजाकब्जा कर लिया गया है। इसके बाद ऐसी जमीनों पर निर्माण की अनुमति लिए बिना आलीशान मकान बना लिए गए हैं। राजस्व विभाग के रिश्वतखोर अफसरों- कर्मचारियों ने मूल कोरबा शहर के सैकड़ों एकड़ जमीन का फर्जीबाड़ा कर रिकार्ड बदल दिया है और शहर के धन्नासेठों के नाम पर दर्ज कर दिया है।

बहरहाल, ऊपर की इस तस्वीर को देखिए, संजय नगर रेलवे क्रासिंग के पास पूर्व में विकसित नगर निगम के गार्डन के मध्य भाग में बांस के खम्भे गड़ा कर उसके ऊपर टाट लगा दिया गया है और बजरंग बली और अन्य देवताओं की मूर्ति रजः दी गई है। अर्थ स्पष्ट है- धर्म और मंदिर की आड़ में कोई असामाजिक तत्व इस जमीन पर बेजा कब्जा कर रहा है।

मजे की बात यह है कि सुनालिया पुल और संजय नगर रेलवे क्रासिंग के बीच जहां यह कारनामा किया गया है, वहां कलेक्टर अजित वसंत बड़ी दरियादिली से बेजा कब्जा का मुआवजा बांट चुके हैं और अंडर पास का निर्माण कर रहे हैं। दूसरा रोचक तथ्य यह है कि नहर किनारे जहां कब्जा हो रहा है, उसके ठीक सामने नहर के दूसरे तट पर नगर निगम का जोन ऑफिस है। लेकिन जोन ऑफिस के किसी कारिन्दे की नजर शायद अब तक इस पर नहीं पड़ी है।

एक और मजेदार तथ्य यह है कि इसके पास ही अब चाय नाश्ता का एक ठेला लगने लगा है और गार्डन के भीतर पालीथिन लगाकर बैठने की व्यवस्था की गई है, जहां बैठकर लोग नाश्ता करते हैं। असल में बेजा कब्जा का तरीका ही यही है कि शुरू में कोई मूर्ति रखकर उस स्थान पर पूजापाठ शुरू कर दें और उसके बाद आसपास के बड़े भू भाग पर कब्जा कर लें।

नेहरू नगर बुधवारी से प्रेस क्लब तिलक भवन के बीच नगर निगम और राजस्व विभाग की सांठगांठ और संरक्षण में सड़क के दोनों दिशाओं में करोड़ों की सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा कर लिया गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर निगम और जिला प्रशासन अंडर पास निर्माण के लिए इस बेजा कब्जा को हटाने का साहस कर भी पाता है या नहीं..?

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