R.O. No. 13952/23
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बिलासपुर, 13 मई। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की बड़ी योजना को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और एलएनजी, यूरिया, अमोनिया तथा मेथेनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना है।योजना के तहत लगभग 75 मिलियन टन कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नई परियोजनाओं को प्लांट एवं मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। परियोजनियों का चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।केंद्र सरकार की इस पहल का असर देश की प्रमुख कोयला कंपनियों में भी दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में South Eastern Coalfields Limited द्वारा भी कोयला गैसीकरण की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। SECL के भटगांव क्षेत्र स्थित महामाया खदान में कोल गैसीफिकेशन की संभावनाओं का परीक्षण और अध्ययन किया जा रहा है। यह पहल भविष्य में कोयले के स्वच्छ और वैकल्पिक उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।कोयला गैसीकरण तकनीक के जरिए कोयले को ‘सिंथेसिस गैस’ (Syngas) में बदला जाता है, जिसका उपयोग उर्वरक, रसायन, ईंधन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है। इससे न केवल आयातित ईंधनों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश में औद्योगिक विकास और वैल्यू एडिशन को भी बढ़ावा मिलेगा।सरकार के अनुसार इस योजना से करीब 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की संभावना है। साथ ही लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे, जिससे कोयला उत्पादक क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी।भारत के पास लगभग 401 बिलियन टन कोयला और 47 बिलियन टन लिग्नाइट भंडार मौजूद हैं। ऐसे में कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन India’ अभियान के लिए एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

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