मनोकामना हुई पूर्ण, भुइयां नापते माँ के दरबार पहुँचे श्रद्धालु

कोरबा 29 सितंबर। आश्विन नवरात्र पर शहर व अंचल में आस्था के अलग-अलग स्वरूप दिखाई दे रहे हैं। आदिशक्ति दुर्गा की उपासना के लिए श्रद्धालु विविध प्रकार से अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। किसी भी प्रयोजन से की गई कामना या इच्छा की पूर्ति होने पर श्रद्धालु ‘भुइयां नापते’ हुए देवी के मंदिर तक पहुँच रहे हैं।

कोरबा जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नवरात्र पर इस तरह के दृश्य आम हैं। सर्वमङ्गला, कोसगाई, महिषासुर मर्दिनी, कंकालिन, सिद्धिदात्री, मड़वारानी के मंदिर की तरफ इस तरह के नशा नजारे लगातार दिखाई दे रहा है। श्रद्धालु समूह बनाकर मंदिर की ओर बढ़ते हैं। इस दौरान कोई स्वयं व्यवस्था संभालता है तो कहीं व्यवस्था अपने आप बन जाती है। कोई सडक की साफ-सफाई करता है, तो कोई आसपास के ट्रैफिक पर ध्यान रखता है, ताकि भीड़ में अव्यवस्था न हो और लंबी दूरी की यात्रा सुरक्षित व सुगम रहे।

बताया गया कि जब किसी व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है तो वह देवी दर्शन के लिए पैदल ही नहीं बल्कि जमीन नापते हुए मंदिर तक पहुँचता है। इस दौरान यह महत्व नहीं रखता कि मंदिर कितनी दूरी पर है या वहाँ तक पहुँचना कितना कठिन है। इस लोक परंपरा की शुरुआत कब हुई, इसका कोई स्पष्ट तथ्य नहीं है। माना जाता है कि बड़े हिस्से में यह परंपरा मानव सभ्यता के विकास के साथ जन्मी और आज तक चल रही है। लोगों का विश्वास है कि उनके जीवन में जो भी अनुकूल होता है, उसमें देवी शक्ति का आशीर्वाद होता है।

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