पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध: पीएम आवास के करीब तक हमलाः खौफ में आसिम मुनीर

काबुल / इस्लामाबाद/ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब ‘पूर्ण युद्ध’ में तब्दील हो चुका है। गुरुवार सुबह से लेकर शुक्रवार तक अफगानिस्तान के जमीनी लड़ाकों और उसकी वायुसेना ने जो पलटवार किए हैं, उससे पाकिस्तान थर्रा उठा है। पिछली दिनों अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक के जवाब में तालिबान सरकार ने गुरुवार रात को डूरंड लाइन पर पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। अफगानिस्तान का दावा है कि इस हमले में उन्होंने पाकिस्तान की 19 चौकियों को तबाह कर दिया और 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के एक सैन्य मुख्यालय पर भी कब्जे का दावा किया है। कई पाक सैनिकों को जिंदा पकड़ने और कई पाक सैनिकों के शवों को भी तालिबानी लड़ाकों ने कब्जे में लिया है। जिसके बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आधिकारिक तौर पर ‘खुली जंग’ का ऐलान कर दिया है।

पीएम आवास के करीब तक हमलाः खौफ में मुनीर

पहली बार अफगान सेना राजधानी इस्लामाबाद पर हवाई हमला करने में सफल हुई है। अफगान वायुसेना के ड्रोन्स ने इस्लामाबाद के हवाई क्षेत्र में सेंध लगाते हुए प्रधानमंत्री आवास से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। एबटाबाद में हुए एक अन्य हमले में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के सलाहकार आशिक खान चौधरी की मौत की खबर ने रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) की नींद उड़ा दी है। पाक ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। पाक सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने माना कि 3 शहरों इस्लामाबाद, एबटाबाद और नौशेरा में ड्रोन हमले हुए हैं। पर तरार ने कहा कि इससे जान-माल नुकसान नहीं हुआ।

ऑपरेशन गजब लिल-हक’ यानि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई

55 सैनिकों की मौत और राजधानी पर हमले से बौखलाए पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन गजय लिल-हक’ (हक या न्याय के लिए खुदा का कहर) शुरू किया है। पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल, कंधार और पक्तिया में. तालिबान के ठिकानों, गोला-बारूद के डिपो और मुख्यालयों पर भारी बमबारी की है। पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर कड़े लहजे में कहा, ‘हमारी बर्दाश्त की हद पार हो चुकी है। अब हमारे और तुम्हारे बीच खुली जंग है।’ पाक सेना के प्रवक्ता ने दावा किया है कि उसने जवाबी हमले में अफगानिस्तान के 270 से ज्यादा लड़ाकों का खात्मा कर दिया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी बयान जारी कर कहा कि उनकी सेना किसी भी आक्रामकता को कुचलने में पूरी तरह सक्षम है।

झगड़े की वजह

2021 में सत्ता में लौटने के बाद से, तालिबान ने ‘पाकिस्तान के पिट्टू’ वाली छवि को तोड़ने की कोशिश की है। काबुल में बैठे मंत्री अब कूटनीतिक स्वायत्तता, वैधता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता पर जोर दे रहे हैं। चाहे वह डूरंड लाइन को मान्यता का मसला हो, भारत से कूटनीतिक संबंध स्थापित करने का मामला हो या अमरीका की और से बगराम एयरबेस सौंपे जाने का मुद्दा। तालिबान हर विषय पर अपनी रणनीतिक स्वायत्ता पर जोर दे रहे हैं। तालिबान का भारत के साथ संपर्क साधना और कूटनीति संबंध स्थापित करना इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। नई दिल्ली के साथ बातचीत करके तालिबान ने संदेश दिया है कि वे अब पाकिस्तान के ‘भारत-विरोधी नैरेटिव’ से बंधे नहीं हैं। तालिबान अब खुद को एक स्वतंत्र भागीदार के रूप में पेश कर रहे हैं, जो इस्लामाबाद के प्रभाव से बाहर निकलकर अपनी विदेश नीति तय कर सकता है। तालिबान को अपनी बी-टीम समझते आ रहे पाकिस्तान के हुक्मरानों को ये रास नहीं आ रहा है।

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