
सर्पमित्र अविनाश ने बताया कि न्यूरो टॉक्सिन वेनम के जहर से भरपूर स्पैक्टिकल कोबरा था, जिसे डोमी या नाजा नाजा कहते हैं। नाम के अनुरूप इसका जहर सीधे तंत्रिका तंत्र पर असर करता है और अगर पीड़ित व्यक्ति अधिक डरे व धड़कन तेज हो जाए तो मुश्किल से एक घंटे के भीतर ही उसकी जान जा सकती है। संभवतः यह चूहे का शिकार करने यहां आया होगा या चूहे की गंध पाकर यहीं अपने बच्चों के लिए अनुकूल दशा देखकर अंडे देने रुक गया। कोबरा के साथ उनके अंडों के खोल भी बाहर निकालकर गिने गए।
उम्र के अनुसार इस प्रजाति की मादा दस से लेकर 30 अंडे दे सकती है। इस प्रजाति के कोबरा के अंडे अप्रैल से जुलाई के बीच ही फूटते हैं। इस प्रक्रिया में 48 से 69 दिन लग जाते हैं और इस दौरान मादा बिना कुछ खाए भूखी-प्यासी अंडों की देखभाल करती एक ही स्थान पर कुंडली मारे बैठी रहती है। यह प्रजाति चूहों के साथ यह दूसरे कोबरा या सर्प को भी आहार बना लेता है। खरमोरा में मिले कोबरा के अंडे आधा से एक घंटे के भीतर ही फूटे होंगे, तभी वे मां के साथ ही दुबके बैठे थे और एक-एक कर बाहर निकल रहे थे।


