March 5, 2026

रंग, रौनक और रिश्तों की गर्मजोशी : जयसिंह अग्रवाल के दरबार में उमड़ा कोरबा, होली मिलन बना शहर का सबसे यादगार जश्न

कोरबा। ऊर्जा नगरी कोरबा में इस बार होली का त्योहार सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं रहा, बल्कि यह मोहब्बत, भाईचारे और जनसंवाद की एक ऐसी महफिल बन गया, जहां रिश्तों की गर्मजोशी खुलकर दिखाई दी। शहर में कई जगह होली मिलन के आयोजन हुए, लेकिन स्वर्ण सिटी स्थित पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के निवास पर सजा होली मिलन समारोह पूरे शहर के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। यहां का नज़ारा ऐसा था मानो पूरा कोरबा एक ही आंगन में इकट्ठा होकर खुशियों का जश्न मना रहा हो।

सुबह से ही स्वर्ण सिटी स्थित निवास पर लोगों का तांता लगना शुरू हो गया था। दोपहर होते-होते यह महफिल एक विशाल जनमिलन में बदल गई। शहर के विभिन्न वार्डों के साथ-साथ दर्री, जमनीपाली, बालको, कटघोरा, पाली, हर्दीबाजार, गेवरा से लेकर पेंड्रा-गौरेला-मरवाही और बिलासपुर तक से हजारों लोग अपने लोकप्रिय नेता से मिलने और होली की मुबारकबाद देने पहुंचे। माहौल में अपनापन ऐसा था कि हर शख्स मुस्कुराते हुए गले मिलता और रंगों के साथ रिश्तों को भी रंगीन करता नजर आया।

समारोह में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, व्यापारी वर्ग, पत्रकारगण, युवा कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। हर आने वाले का दिल से इस्तकबाल किया गया। जयसिंह अग्रवाल स्वयं आगे बढ़कर लोगों से गले मिलते, अबीर-गुलाल लगाते और पूरे अपनत्व के साथ उनका हालचाल पूछते दिखाई दिए। यही सादगी और आत्मीयता इस आयोजन को खास बना रही थी।

ढोलक की थाप, फाग गीतों की मधुर तान और उड़ते गुलाल ने पूरे माहौल को रंगीन बना दिया। कहीं पुराने दोस्त बरसों की दूरी भूलकर गले मिल रहे थे, तो कहीं हंसी-मजाक और ठहाकों के बीच रंगों की बौछारें चल रही थीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस रंगोत्सव में डूबा नजर आ रहा था।

समारोह की खास बात यह रही कि यहां पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। पूरे आयोजन में हर्बल गुलाल का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह संदेश दिया गया कि त्योहार मनाने के साथ-साथ प्रकृति की हिफाजत भी उतनी ही जरूरी है।

इस अवसर पर जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि “होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और मोहब्बत का पैगाम देने का पर्व है। यदि साल भर में किसी से अनजाने में कोई गलती हो गई हो तो इस मौके पर उसे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाना ही इस त्योहार की असली रूह है।”

गौरतलब है कि जयसिंह अग्रवाल वर्षों से अपने निवास पर होली मिलन समारोह आयोजित करते आ रहे हैं, लेकिन इस वर्ष उमड़ी भीड़ ने इसे और भी यादगार बना दिया। स्वर्ण सिटी का यह परिसर उस वक्त किसी मेले से कम नहीं लग रहा था। लोग न केवल रंगों में सराबोर थे, बल्कि अपने नेता के प्रति सम्मान और स्नेह भी खुलकर जता रहे थे।

दरअसल कोरबा की राजनीति में जयसिंह अग्रवाल का कद केवल पद से नहीं, बल्कि उनके जनसरोकारों से तय होता रहा है। उन्हें शहर का ऐसा जननेता माना जाता है जो आज भी जनहित के सवालों पर किसी से भी भिड़ने में गुरेज नहीं करते। जब वे राज्य सरकार में मंत्री थे और सत्ता भी उनकी ही पार्टी की थी, तब भी प्रशासनिक मनमानियों के खिलाफ खुलकर खड़े होते रहे। अधिकारियों के सामने आम लोगों की आवाज बनकर खड़े होना उनकी पहचान बन चुकी है।

कोरबा में सरकारी जमीन पर वर्षों से बसे हजारों गरीब परिवारों को पट्टा दिलाने की पहल भी उनकी ही देन मानी जाती है। पूरे राज्य में यह पहल कोरबा की पहचान बन गई, जहां लोगों को अपने आशियाने पर वैधानिक हक मिला। छोटे-छोटे व्यापारियों और ठेला-फेरी करने वाले लोगों के लिए भी वे कई बार ढाल बनकर खड़े हुए, जब कभी उन पर कार्रवाई या भयादोहन की आशंका मंडराई।

राजनीतिक दृष्टि से भी उनका सफर बेहद मजबूत रहा है। करीब 15 वर्षों तक वे लगातार कोरबा के विधायक रहे और शहर की राजनीति को दिशा देते रहे। यही नहीं, कोरबा नगर निगम में दो-दो बार कांग्रेस का महापौर बनना भी उनकी राजनीतिक कुशलता और संगठन क्षमता का परिणाम माना जाता है।

शायद यही वजह है कि होली के इस रंगीन मौके पर जयसिंह अग्रवाल के निवास पर उमड़ा यह जनसैलाब केवल एक होली मिलन समारोह नहीं था, बल्कि जनता के भरोसे, मोहब्बत और लंबे राजनीतिक रिश्ते का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया।

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Markandey Mishra

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