देखिए कलेक्टर साहब : कांग्रेस जमाने से मलाई खा रहे मत्स्य अधिकारी क्रांति कुमार बघेल , कैसे भाजपा कार्यकाल में भी लगा रहे चूना ! 10 हजार के जाल को 20 हजार में खरीदकर विभाग को लगाया 3 लाख का चूना
24 घंटे में दोगुनी कीमत , 8 लाख की डायरेक्ट खरीदी , चहेते फर्म को फायदा पहुंचाने का बड़ा खेल उजागर
कोरबा | MK News Hub (इन्वेस्टिगेशन फॉलोअप)
कोरबा का मत्स्य पालन विभाग इन दिनों ऐसी खरीदी का गवाह बन रहा है , जो न केवल सवाल खड़े करती है बल्कि सीधे-सीधे सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर संदेह भी पैदा करती है । हमारी पिछली रिपोर्ट में जिस “खेल” की शुरुआत का खुलासा हुआ था , अब उसके ठोस दस्तावेज सामने आ गए हैं । MKhubnews के पास मौजूद ये दस्तावेज बताते हैं कि विभाग में न सिर्फ महंगी खरीदी की गई , बल्कि भंडार क्रय नियमों को दरकिनार कर 8 लाख की बिना टेंडर डायरेक्ट खरीदी कर अपात्र लेकिन चहेते फर्म को लाभ पहुंचाने का पूरा तंत्र को काम पर लगा दिया।
इस पूरे मामले के केंद्र में सहायक संचालक , मत्स्य पालन , कोरबा क्रांति कुमार बघेल का नाम सामने आ रहा है , जिनके कार्यकाल में यह पूरी खरीदी प्रक्रिया संपन्न हुई ।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सहायक संचालक क्रांति कुमार बघेल ने खुद एक दिन पहले जिस सामग्री की कीमत 10,000 रुपये प्रति नग तय कर क्रय अनुमति दी थी, उसी प्रकार के जाल को अगले ही दिन 20,000 रुपये प्रति नग की दर से खरीद लिया । यह अंतर सामान्य नहीं है — यह सीधे-सीधे दोगुना है और यहीं से पूरे मामले की गंभीरता शुरू होती है । हैरत की बात यह है इसी कंपनी और साइज का फिशिंग नेट आज की तारीख में जेम में 310 रुपये में मौजूद है।
9 जून का आदेश : विभाग ने खुद तय किया 10,000 रुपये प्रति जाल
दिनांक 09 जून 2025 को सहायक संचालक , मछली पालन , कोरबा क्रांति कुमार बघेल द्वारा जारी स्वीकृति आदेश में “Fingerling Collection Net” की खरीदी के लिए दर 10,000 रुपये प्रति नग निर्धारित की गई । इस आदेश में कुल 160 नग जाल की खरीदी स्वीकृत की गई थी , जिसकी कुल लागत 8,00,000 रुपये दर्शाई गई ।

यह विभाग का स्वयं का आधिकारिक दस्तावेज है , जिसमें प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति भी शामिल है । यानी विभाग ने खुद इस रेट को उचित माना ।
10 जून का GeM कॉन्ट्रैक्ट : 20,000 रुपये प्रति जाल
ठीक अगले ही दिन , 10 जून 2025 को Government e Marketplace (GeM) के माध्यम से “GARWARE Fishing Nets” की खरीदी की गई । इस बार प्रति जाल कीमत 20,000 रुपये दर्ज की गई और कुल 40 नग जाल खरीदे गए । कुल राशि फिर से 8,00,000 रुपये रही ।

यानी एक ही विभाग , लगभग एक ही समय और समान उपयोग वाली सामग्री — लेकिन कीमत दोगुनी ।
24 घंटे में दोगुनी कीमत : तकनीकी अंतर या मूल्य हेरफेर ?
विभाग यह तर्क दे सकता है कि 50×20 और 100×20 के आकार में अंतर है , लेकिन क्या यह अंतर कीमत को बिल्कुल दोगुना करने के लिए पर्याप्त है ? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह अंतर सामान्य व्यापारिक प्रवृत्ति से मेल नहीं खाता ।

इसके अलावा 160 नग की bulk खरीदी में कम दर और 40 नग की खरीदी में अधिक दर होना भी संदेह को और मजबूत करता है ।
किससे खरीदा गया ? सप्लायर भी सवालों में
GeM कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार यह खरीदी “MARINE PRODUCTS” नामक फर्म से की गई , जो रायपुर स्थित है । दस्तावेज बताते हैं कि यह फर्म “Reseller not verified by OEM” श्रेणी में आती है , यानी ब्रांड की अधिकृत विक्रेता नहीं है ।
इसके बावजूद लाखों रुपये की खरीदी इसी फर्म से की गई । यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अधिकृत सप्लायर्स को नजरअंदाज किया गया ?
नियमों की अनदेखी : 8 लाख की डायरेक्ट खरीदी
इस खरीदी में “Direct Purchase” मोड का उपयोग किया गया । छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों के अनुसार पहले 3 लाख और दिसम्बर 2025 संशोधन के बाद 5 लाख रुपये तक ही डायरेक्ट खरीदी की अनुमति है ।
इसके बावजूद 10 जून 2025 को 8 लाख रुपये की खरीदी सीधे कर दी गई , जो नियमों से परे दिखाई देती है । ऐसी स्थिति में प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया आवश्यक थी ।
चहेते फर्म को फायदा पहुंचाने का आरोप
जब किसी एक फर्म को बिना प्रतिस्पर्धा के , अधिक दर पर और सीमा से अधिक राशि में ऑर्डर दिया जाता है , तो यह स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करता है कि कहीं यह विशेष लाभ पहुंचाने का मामला तो नहीं ।
तकनीकी गड़बड़ियां : कई स्तर पर सवाल
- OEM verification नहीं
- HSN कोड स्पष्ट नहीं
- Reseller के माध्यम से सप्लाई
- Direct purchase में उच्च राशि
- Rate comparison का अभाव
पैटर्न बनता दिख रहा है
पहले सामने आए मामलों और इस नए खुलासे को जोड़ने पर एक पैटर्न उभरता है — डायरेक्ट ऑर्डर , अधिक दर और सीमित फर्मों को बार-बार लाभ ।
310 रुपये में जेम में मिल रहा फिशिंग नेट

जिम्मेदारी किसकी ?
इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है । क्या यह निर्णय सहायक संचालक क्रांति कुमार बघेल के स्तर पर लिया गया या उच्च स्तर की स्वीकृति भी इसमें शामिल थी ?
आगे और खुलासे बाकी
MK News Hub के पास इस विभाग से जुड़े और भी दस्तावेज उपलब्ध हैं । आने वाले दिनों में फर्म नेटवर्क , भुगतान प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े अन्य खुलासे किए जाएंगे ।
यह मामला अब केवल आरोपों तक सीमित नहीं है । दस्तावेज दिखाते हैं कि 24 घंटे में एक ही सामग्री के लिए दोगुनी कीमत पर खरीदी की गई और वह भी नियमों की सीमा से अधिक डायरेक्ट पर्चेस के माध्यम से ।
(MK News Hub इन्वेस्टिगेशन टीम | खुलासा जारी रहेगा…)
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