विश्व जल दिवस पर बालको का बड़ा अभियान ! ‘मोर जल मोर माटी’ से 40 गांवों में जल क्रांति
150 से अधिक लोगों की भागीदारी, 158 जल संरचनाएं तैयार, किसानों की आय और सिंचाई में हुआ बड़ा सुधार
बालकोनगर । वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने विश्व जल दिवस के अवसर पर सामुदायिक जल संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना के तहत तालाब पुनर्जीवन अभियान चलाया । इस अभियान में 150 से अधिक कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने भाग लेकर पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और सतत जल उपयोग के प्रति जागरूकता का संदेश दिया ।
40 से अधिक गांवों में जल संरचनाओं का विकास
कंपनी द्वारा अब तक 40 से अधिक गांवों में जल संरक्षण संरचनाएं विकसित एवं पुनर्जीवित की जा चुकी हैं । इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे कृषि कार्यों को मजबूती मिली है और किसानों की निर्भरता केवल बारिश पर नहीं रह गई है ।
158 जल संरचनाएं, 2.30 लाख घन मीटर से अधिक क्षमता
परियोजना के तहत कुल 158 जल संरचनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें 129 खेत तालाब, 15 सामुदायिक तालाब, 12 चेक डैम और 2 लाइनिंग तालाब शामिल हैं । इनकी कुल जल संग्रहण क्षमता 2.30 लाख घन मीटर से अधिक है । वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में ही 22 नई संरचनाएं (21 खेत तालाब और 1 सामुदायिक तालाब) निर्मित की गई हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 22 हजार घन मीटर है ।
सीईओ ने बताया जल संरक्षण का महत्व
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि जल संरक्षण सतत विकास और मजबूत समाज की नींव है । ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना के माध्यम से कंपनी स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर जल संसाधनों को पुनर्जीवित कर रही है, जिससे कृषि, आजीविका और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिल रहा है । उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है ।
किसानों की आय में हुआ इजाफा
इन जल संरचनाओं के निर्माण से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने लगा है, जिससे वे अब साल में कई फसलें उगा पा रहे हैं । इसके साथ ही पशुपालन के लिए भी पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है ।
मछली पालन बना अतिरिक्त आय का जरिया
परियोजना के तहत 80 किसानों ने मछली पालन को अतिरिक्त आय के रूप में अपनाया है । इससे उन्हें प्रत्येक फसल चक्र में औसतन 20 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो रही है । इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है ।
महिला किसान की सफलता की कहानी
कोरबा के समीप भाटगांव की किसान संध्या बाई ने बताया कि खेत में तालाब बनने से अब वह मछली पालन और सब्जी खेती दोनों कर पा रही हैं । इससे उनके परिवार की आय में वृद्धि हुई है और आर्थिक स्थिति में सुधार आया है ।
भूजल स्तर में सुधार, पर्यावरण संतुलन मजबूत
इस पहल से क्षेत्र में भूजल स्तर में सुधार हुआ है और लंबे समय तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है । तालाबों और अन्य जल संरचनाओं के पुनर्निर्माण से वर्षा जल का संचयन बढ़ा है, जिससे जल का अपव्यय कम हुआ है और पर्यावरण संतुलन मजबूत हुआ है ।
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