धूप में सात फेरे : 260 जोड़ों को तपती जमीन पर बैठाकर निपटाई गई ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ ?
कोरबा। गरीब परिवारों की बेटियों के सम्मान और सुरक्षित भविष्य का दावा करने वाली मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना कोरबा में सवालों के घेरे में आ गई है। जिले में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 260 जोड़ों को भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच खुले आसमान के नीचे बैठाकर विवाह की रस्में पूरी कराई गईं। आयोजन की तस्वीरें प्रशासनिक अव्यवस्था और संवेदनहीनता की कहानी बयां करती नजर आईं। इस आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर डीपीओ बसंत मिंज और शहरी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
ऊपर आग उगलता सूरज, नीचे तपती जमीन
आयोजन स्थल पर पर्याप्त टेंट, कूलिंग व्यवस्था या मौसम के अनुरूप सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आए। भारी लहंगे और शेरवानी में बैठे नवविवाहित जोड़े घंटों पसीने में तर-बतर होते रहे। कई दुल्हनें असहज दिखीं, कुछ दूल्हे गर्मी से बेहाल नजर आए, फिर भी कार्यक्रम औपचारिकता की तरह चलता रहा।
मंच सजा, भाषण हुए… पर जिनके लिए कार्यक्रम था ?
मंच, बैनर और स्वागत की भव्यता तो दिखी, लेकिन जिन 260 जोड़ों के लिए यह आयोजन था, उनकी सेहत और सुविधा को नजरअंदाज कर दिया गया। मौसम की चेतावनी के बावजूद छाया और ठंडक की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई, यह बड़ा सवाल बन गया है।
क्या गरीब बेटियों के लिए मानक अलग हैं?
क्या प्रशासन के पास मौसम की जानकारी नहीं थी? क्या 260 जोड़ों के लिए मजबूत टेंट और कूलिंग की व्यवस्था करना इतना कठिन था? या फिर यह मान लिया गया कि गरीब परिवारों की बेटियां सब सह लेंगी?
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क इस आयोजन में साफ दिखाई दिया। तस्वीरें खुद गवाही दे रही हैं कि योजना की संवेदनशीलता कागजों तक सीमित रह गई।
जिम्मेदारी तय होगी या मामला दबेगा ?
इस आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर डीपीओ बसंत मिंज और शहरी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। क्या स्थल निरीक्षण हुआ था ? क्या स्वास्थ्य और मौसम को लेकर कोई ठोस तैयारी की गई थी ?
अब देखना यह है कि इस अव्यवस्था पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
