कोरबा मत्स्य विभाग में बड़ा घोटाला ? चार साल से जमे अधिकारी पर गंभीर आरोप , सबूत सामने — जल्द होगा बड़ा खुलासा
कोरबा | MK News Hub (इन्वेस्टिगेशन)
कोरबा जिले के मत्स्य पालन विभाग में लंबे समय से चल रहे कथित खेल पर अब बड़ा खुलासा होने की तैयारी है । विभाग में पिछले लगभग चार वर्षों से पदस्थ सहायक संचालक क्रांति कुमार बघेल के कार्यकाल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं । उपलब्ध दस्तावेजों , भुगतान रिकॉर्ड और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े कागजातों की पड़ताल में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं , जो पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं । यह मामला सामान्य अनियमितता से कहीं आगे बढ़कर योजनाओं के व्यवस्थित दुरुपयोग की ओर संकेत करता है ।
डायरेक्ट ऑर्डर का खेल , नियमों को दरकिनार कर खरीदी ?
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि विभाग द्वारा कई योजनाओं में निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया । सरकारी नियमों के अनुसार एक निश्चित सीमा से अधिक की खरीदी में प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया आवश्यक होती है , लेकिन यहां कई मामलों में सीधे सप्लायर को ऑर्डर जारी किए गए । इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और नियमों को दरकिनार किया गया ।
बाजार से दुगने दाम पर खरीदी , कीमतों में भारी अंतर
जांच में यह भी सामने आया है कि कई सामग्रियों की खरीदी बाजार मूल्य से कहीं अधिक दर पर की गई । जाल , आईस बॉक्स , बायोफ्लॉक टैंक जैसी वस्तुओं के बिल और बाजार दरों की तुलना करने पर कीमतों में बड़ा अंतर दिखाई देता है । यह अंतर कई मामलों में इतना अधिक है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित मूल्य हेरफेर की ओर संकेत करता है ।
एक व्यक्ति , तीन फर्म , सप्लाई नेटवर्क पर गंभीर सवाल
दस्तावेजों की पड़ताल में यह संकेत मिला है कि अलग-अलग नामों से कार्य कर रही कुछ फर्मों का संचालन एक ही व्यक्ति या समूह से जुड़ा हो सकता है । यदि यह तथ्य प्रमाणित होता है तो यह फर्जी प्रतिस्पर्धा और हितों के टकराव का स्पष्ट मामला बनता है , जिसमें एक ही नेटवर्क को बार-बार लाभ पहुंचाया गया ।
हितग्राहियों के नाम पर गड़बड़ी , जमीन और कागज में अंतर
मत्स्य विभाग की योजनाएं मछुआरों और ग्रामीण हितग्राहियों के लिए बनाई जाती हैं , लेकिन जांच में यह सामने आया है कि कई मामलों में लाभार्थियों को पूर्ण सामग्री नहीं मिली या केवल कागजों में लाभ दिखाया गया । कुछ मामलों में एक ही नेटवर्क से जुड़े लोगों को बार-बार लाभ दिए जाने के संकेत भी मिले हैं ।
डीएमएफ फंड में भी गड़बड़ी के संकेत , लागत ज्यादा काम कम
सूत्रों के अनुसार विभाग द्वारा संचालित कई कार्यों में जिला खनिज न्यास निधि (DMF) का उपयोग किया गया । दस्तावेजों में यह संकेत मिलता है कि कुछ कार्यों की लागत अधिक दर्शाई गई जबकि वास्तविक कार्य अपेक्षाकृत कम हुआ । यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला बन सकता है ।
प्रशिक्षण योजनाओं में खर्च ज्यादा , परिणाम संदिग्ध
शिक्षण और प्रशिक्षण से संबंधित योजनाओं में भी कई सवाल उठ रहे हैं । रिकॉर्ड में भारी खर्च दर्शाया गया है , लेकिन प्रतिभागियों की उपस्थिति , प्रशिक्षण की गुणवत्ता और परिणाम स्पष्ट नहीं हैं । इससे यह आशंका पैदा होती है कि कई कार्यक्रम केवल कागजों में ही संचालित किए गए ।
पूरे मामले में उभर रहा एक पैटर्न
अब तक सामने आए तथ्यों को जोड़ने पर एक स्पष्ट पैटर्न उभरता है , जिसमें सीधे ऑर्डर , अधिक दर पर खरीदी , सीमित फर्मों को बार-बार काम और लाभार्थियों में गड़बड़ी जैसे तत्व शामिल हैं । यह संकेत देता है कि मामला एक संगठित तंत्र के तहत संचालित हो सकता है ।
चार साल से एक ही पद पर पदस्थ अधिकारी , जवाबदेही पर सवाल
एक ही अधिकारी का लंबे समय तक एक ही पद पर पदस्थ रहना भी चर्चा का विषय बना हुआ है । प्रशासनिक दृष्टि से यह स्थिति पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती है और स्थानीय स्तर पर प्रभाव बढ़ने की संभावना रहती है । यही कारण है कि अब इस पूरे कार्यकाल की गहन जांच की मांग उठ रही है ।
सबूत मौजूद , जल्द होगा सिलसिलेवार खुलासा
MK News Hub के पास इस पूरे मामले से जुड़े कई दस्तावेज उपलब्ध हैं , जिनमें बिल , भुगतान रिकॉर्ड , योजना से संबंधित कागजात और फर्मों के बीच संबंधों के संकेत शामिल हैं । आने वाले दिनों में इन सभी तथ्यों का सिलसिलेवार खुलासा किया जाएगा , जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके ।
सवालों के घेरे में पूरा विभाग
कोरबा का मत्स्य विभाग , जो मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कार्य करता है , अब खुद गंभीर सवालों के घेरे में है । यदि सामने आए तथ्य प्रमाणित होते हैं , तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करेगा ।
(MK News Hub इन्वेस्टिगेशन टीम)
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