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कोरबा मत्स्य विभाग में फर्म नेटवर्क का बड़ा खुलासा (Part-3) : रायपुर की तीन फर्म, मालिक एक ? बघेल कनेक्शन की जांच तेज,  जाल खरीदी तो सिर्फ एक बानगी, अब Ice Box, Fish Feed और फर्मों के बीच रिश्तों की खुलने लगीं परतें !

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कोरबा | MK News Hub (इन्वेस्टिगेशन फॉलोअप)

कोरबा के मत्स्य पालन विभाग में सामने आया जाल खरीदी का मामला अब एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। MK News Hub की पड़ताल में अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि रायपुर की तीन अलग-अलग फर्में, जिनके नाम अलग हैं, लेकिन संचालन संभवतः एक ही व्यक्ति या समूह द्वारा किया जा रहा है।

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इस पूरे मामले में एक और कड़ी के रूप में सहायक संचालक क्रांति कुमार बघेल का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है, जिनके कार्यकाल में इन खरीदी प्रक्रियाओं को अंजाम दिया गया।

तीन फर्म, एक नेटवर्क ?

जांच के दौरान जिन फर्मों के नाम सामने आए हैं, उनमें “Marine Products”, “Fishco Marine Product” और “Jai Shri Krishna” शामिल हैं। प्रथम दृष्टया ये तीनों अलग-अलग फर्म प्रतीत होती हैं, लेकिन दस्तावेजों और सप्लाई पैटर्न का विश्लेषण करने पर इनके बीच संभावित संबंधों के संकेत मिल रहे हैं।

यदि यह तथ्य प्रमाणित होता है कि इन फर्मों का संचालन एक ही व्यक्ति या समूह द्वारा किया जा रहा है, तो यह फर्जी प्रतिस्पर्धा (dummy bidding) और हितों के टकराव (conflict of interest) का स्पष्ट मामला बन सकता है।

कैसे जुड़ रही हैं कड़ियां ?

दस्तावेजों में यह देखा गया है कि अलग-अलग खरीदी में अलग-अलग फर्मों के नाम सामने आते हैं, लेकिन:

  • सप्लाई का पैटर्न समान है
  • संपर्क सूत्रों में समानता के संकेत
  • भौगोलिक लोकेशन (रायपुर) एक ही
  • सामग्री की श्रेणी और दरों में समानता

ये सभी बिंदु यह संकेत देते हैं कि कहीं न कहीं एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से काम किया जा रहा है।

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Ice Box और Fish Feed में भी वही पैटर्न ?

सूत्रों के अनुसार Ice Box और Fish Feed की खरीदी में भी इन्हीं फर्मों के नाम सामने आ रहे हैं। यदि यह सही साबित होता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि अलग-अलग सामग्री की खरीदी में एक ही नेटवर्क को लगातार लाभ पहुंचाया गया।

DMF फंड और योजनाओं में संभावित खेल

इस पूरे मामले में जिला खनिज न्यास निधि (DMF) के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या केंद्रीय योजनाओं से लेकर DMFT तक एक ही पैटर्न में फंड का उपयोग किया गया और क्या इसमें भी किसी प्रकार की अनियमितता हुई।

बघेल कनेक्शन पर नजर

इस पूरे नेटवर्क में सहायक संचालक क्रांति कुमार बघेल की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उनके कार्यकाल में इन खरीदी प्रक्रियाओं का बार-बार होना कई सवाल खड़े करता है।

क्या यह केवल प्रशासनिक संयोग है या फिर किसी व्यवस्थित नेटवर्क के तहत निर्णय लिए गए? यह जांच का प्रमुख विषय बन चुका है।

पैटर्न अब साफ दिखने लगा

अब तक सामने आए तथ्यों को जोड़ने पर एक स्पष्ट पैटर्न उभरता है:

  • डायरेक्ट खरीदी
  • अधिक दर
  • सीमित फर्मों को काम
  • अब संभावित फर्म नेटवर्क

यह मामला अब केवल एक खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

बड़ा खुलासा जल्द

MK News Hub की टीम इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इन फर्मों के वास्तविक मालिक, उनके बीच संबंध और विभागीय स्तर पर लिए गए निर्णयों की पूरी परत खोली जाएगी।

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बने रहिए MK News Hub के साथ — क्योंकि यह सिर्फ शुरुआत है, असली खुलासा अभी बाकी है…

(MK News Hub इन्वेस्टिगेशन टीम | Part-3 जारी)

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