घटना के तुरंत बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मलबे में दबे मजदूरों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग सहम गए। तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी गई। कोतवाली थाना से चिता स्क्वाड के आरक्षक संदीप टंडन और प्यारे भरतद्वाज तथा 112 की टीम के आरक्षक वेदप्रकाश और अजय घटना स्थल पर पहुंचे।
पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया
चिता स्क्वाड और 112 टीम ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया। टीम ने मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकालने में भरपूर मेहनत की। पुलिसकर्मियों ने घायलों को अपने कंधों पर उठाकर एंबुलेंस तक पहुँचाया, जिससे उन्हें जल्द से जल्द इलाज मिल सके।
घायलों की गंभीर हालत, मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी
इस हादसे में झाम बाई, दिलहरण, और एक 17 वर्षीय नाबालिग मजदूर घायल हुए हैं। झाम बाई के जांघ में लोहे की छड़ घुस गई है, जबकि दिलहरण और नाबालिग मजदूर को भी गंभीर चोटें आई हैं। सभी घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
घटना के बाद निर्माणाधीन इमारत में सुरक्षा के मानकों पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरों का कहना है कि सुरक्षा उपकरणों की कमी और उचित देखरेख के अभाव के कारण ये हादसा हुआ। एक नाबालिग से जोखिम भरा काम कराना भी नियमों के उल्लंघन को दर्शाता है।
पुलिस की तत्परता से बची जान
इस हादसे में पुलिस की तत्परता और मानवीय संवेदना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पुलिस फोर्स सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने में ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में मानवीय सहायता प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।