रायपुर – छत्तीसगढ़ में सरकारी शराब दुकानों के लिए कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली मैनपावर एजेंसियों को 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान कराकर कमीशन वसूलने का आरोप है। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में अंतिम चार्जशीट पेश की। इसमें 13 आरोपी बनाए गए है। ईओडब्ल्यू के अनुसार, कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस, चार दिन के हॉलीडे-पे और सर्विस चार्ज के नाम पर यह रकम जारी कराई गई। इसका लाभ तीन हजार से अधिक कर्मचारियों को मिलना था, लेकिन उन्हें सामान्य वेतन ही दिया गया।
आरोप है कि एजेंसियों ने अतिरिक्त भुगतान की रकम निकालकर उसका एक हिस्सा अधिकारियों और कथित सिंडिकेट तक नकद कमीशन के रूप में पहुंचाया। इस मामले में तत्कालीन सीएसएमसीएल प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी, तत्कालीन डिप्टी एमडी नवीन प्रताप सिंह तोमर, कारोबारी अनवर ढेबर और मैनपावर एजेंसियों के संचालकों की भूमिका सामने आई है। ईओडब्ल्यू ने जांच पूरी कर बुधवार को अंतिम चार्जशीट पेश की। इसमें 13 अधिकारी, कर्मचारी और कारोबारियों को आरोपी बनाया गया है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष 2019 में मैनपावर एजेंसियों के टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया। नियमित वेतन के अलावा ओवरटाइम, बोनस और हॉलीडे-पे के भुगतान का प्रावधान जोड़ा गया। आरोप है कि एजेंसियों ने कर्मचारियों के नाम पर इन मदों में अतिरिक्त भुगतान के बिल प्रस्तुत किए, लेकिन संबंधित कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया। सीएसएमसीएल से मिली रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर कमीशन भुगतान और एजेंसियों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने में किया गया।
अरुणपति के कार्यकाल में 152.40 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 16 अप्रैल 2023 तक सीएसएमसीएल के प्रबंध संचालक रहे। ईओडब्ल्यू के मुताबिक, इस दौरान पांच मैनपावर एजेंसियों को 152.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इसमें 82.66 करोड़ रुपए ओवरटाइम, 45.01 करोड़ रुपए हॉलीडे-पे, 12.20 करोड़ रुपए बोनस और 12.50 करोड़ रुपए सर्विस चार्ज के नाम पर दिए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर कमीशन वसूली की व्यवस्था बनाई गई। एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपए तक कमीशन वसूलने का आरोप है। इनमें सुमीत फैसिलिटीज से करीब 15.65 करोड़ रुपए वसूलने के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।
अनवर ढेबर पर कमीशन नेटवर्क नियंत्रित करने का आरोप
ईओडब्ल्यू के अनुसार, कारोबारी अनवर ढेबर कथित सिंडिकेट में अवैध रकम के संग्रह, नियंत्रण और वितरण की मुख्य कड़ी था। आरोप है कि मैनपावर एजेंसियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपए कमीशन वसूला जाता था। शुरुआत में मुख्य बिल पर 3% और ओवरटाइम की रकम पर 25% तक कमीशन तय था। बाद में अनवर के निर्देश पर कमीशन की दर बढ़ाकर 33% तक कर दी गई।
मैनपावर कंपनियों को करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान
ईओडब्ल्यू के अनुसार, सुमीत फैसिलिटीज को 60.56 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान मिला। इसमें से करीब 28.44 करोड़ रुपए कमीशन के रूप में देने का आरोप है। ए-टू-जेड एजेंसी को 34.06 करोड़ रुपए मिले, जिनमें से 6.90 करोड़ रुपए कमीशन के तौर पर दिए गए। प्राइमवन वर्कफोर्स को 40.27 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इसमें से 14.06 करोड़ रुपए कमीशन देने का आरोप है। बच्छराज लोहिया की ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज कंपनियों को कुल 48.08 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान मिला। इनमें ईगल हंटर को 33.45 करोड़ और अलर्ट कमांडोज को 14.63 करोड़ रुपए दिए गए। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस समूह ने कथित सिंडिकेट को 13.58 करोड़ रुपए नकद कमीशन दिया। बच्छराज लोहिया पर फर्जी बिल तैयार कराने और कमीशन भुगतान की व्यवस्था संचालित करने का आरोप है।
28.80 लाख की जब्ती से मिली कमीशन की कड़ी
29 नवंबर 2023 को ईगल हंटर के कर्मचारी तिजऊराम निर्मलकर और अभिषेक सिंह से 28.80 लाख रुपए जब्त किए गए थे। दोनों ने बैंक से 29.40 लाख रुपए निकाले थे। इसमें से 60 हजार रुपए कार्यालय खर्च के लिए रखे गए, जबकि शेष 28.80 लाख रुपए अक्टूबर 2023 के लंबित बिल पास कराने के एवज में कमीशन के रूप में पहुंचाए जाने थे। ईओडब्ल्यू ने नीरज चौधरी पर बिलिंग, वित्तीय प्रबंधन और कमीशन की गणना में भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। अजय लोहिया पर कंपनी स्तर पर कमीशन की व्यवस्था संचालित करने और एन. उदय राव पर स्थानीय समन्वय तथा नकद निकासी की व्यवस्था संभालने का आरोप है।
इन 13 पर घोटाले का आरोप
- अरुणपति त्रिपाठी- तत्कालीन प्रबंध संचालक, सीएसएमसीएल
- नवीन प्रताप सिंह तोमर -तत्कालीन उप महाप्रबंधक, सीएसएमसीएल
- बच्छराज लोहिया – नई दिल्ली और रायपुर
- अनवर ढेबर – बैरन बाजार
- तिजऊराम निर्मलकर -शास्त्री नगर
- अभिषेक सिंह – बलिया, उत्तर प्रदेश
- नीरज चौधरी – गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
- अजय लोहिया – गुड़गांव, हरियाणा
- अजीत दराडे – पुणे
- अमित प्रभाकर सालुंके – गुड़गांव, हरियाणा
- राजीव द्विवेदी – भोपाल, मध्य प्रदेश
- संजीव जैन – भोपाल, मध्य प्रदेश
- एन. उदय राव – सुपेला, दुर्ग
तीन स्तर पर तैयार की गई स्क्रिप्ट
ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक, मैनपावर घोटाले की कथित योजना तीन स्तर पर संचालित होती थी। पहले चरण में टेंडर की शर्तों में बदलाव और अतिरिक्त भुगतान की मदों के जरिए रकम जुटाने की व्यवस्था बनाई गई। दूसरे चरण में मैनपावर एजेंसियों ने अतिरिक्त बिलों के आधार पर भुगतान लिया और बैंक से नकदी निकाली। तीसरे चरण में इस रकम का एक हिस्सा कमीशन के रूप में अधिकारियों और कथित सिंडिकेट तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, हवाला और अंगड़िया नेटवर्क के जरिए 60 से 70 करोड़ रुपए मुंबई और हैदराबाद भेजे गए। अरुणपति त्रिपाठी पर परिवार से जुड़ी फर्म के माध्यम से तीन करोड़ रुपए बेंगलुरु में संपत्ति में निवेश के लिए स्थानांतरित करने का आरोप है।
