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R.O. No. 13952/23
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रायपुर। मुख्यमंत्री निवास शुक्रवार को नवरात्रि की भक्ति, गरबा की लय और उत्साह के रंगों से सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आयोजित गरबा महोत्सव में माताओं-बहनों, बेटियों और गुजराती समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने मां दुर्गा की आराधना के साथ गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना के साथ नारी सम्मान का भी महापर्व है।।

गरबा की लय के बीच गूंजा मां दुर्गा का जयकारा

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति संगीत और पारंपरिक गरबा ने उत्सव का माहौल बना दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं भी दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है। गुजरात से निकली यह परंपरा आज देशभर में उत्साह के साथ मनाई जाती है और भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

महतारी वंदन से 68 लाख महिलाओं को आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री साय ने महिला सशक्तीकरण को राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, यह राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचती है, जिससे उन्हें अपनी जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार के खर्चों में सहायता मिलती है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की 14 लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं के परिश्रम, सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रमाण बताते हुए कहा कि महिलाएं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं, यही सरकार का संकल्प है।

मां दंतेश्वरी से मां बम्लेश्वरी तक, शक्ति आराधना की समृद्ध परंपरा

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में शक्ति की आराधना की परंपरा सदियों पुरानी है। माता कौशल्या की पावन धरती छत्तीसगढ़ में बस्तर की मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी सहित अनेक देवी धाम आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान प्रदेश के विभिन्न शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है। ये धार्मिक स्थल केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रमुख देवी धामों में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है।

गुजराती समाज के योगदान की सराहना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के विकास में गुजराती समाज की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि समाज ने व्यापार, उद्योग, शिक्षा, सेवा और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विशेषता विभिन्न समाजों और संस्कृतियों को आत्मीयता से अपनाना है। गरबा जैसे आयोजन सांस्कृतिक विविधता में एकता, आपसी सद्भाव और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करते हैं। ऐसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का भी माध्यम हैं।

कई मंत्री और गुजराती समाज के पदाधिकारी रहे मौजूद

गरबा महोत्सव में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल और तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित विभिन्न आयोगों एवं मंडलों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष उपस्थित रहे।

इसके अलावा सर्व गुजराती समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतेश गांधी, पूर्व विधायक एवं एन.आर. गुजराती एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष देवजी पटेल, गुजराती स्कूल के अध्यक्ष जयंती पटेल तथा गुजराती समाज के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि शक्ति, सकारात्मकता और सामूहिकता का संदेश देती है। मां दुर्गा के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति करे और हर परिवार के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि आए, यही उनकी कामना है।

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