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R.O. No. 13952/23
R.O. No. 13952/23

रायपुर – छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच अब शहरों की सीमा से लगे कई गांवों का स्वरूप बदल सकता है। प्रदेश में एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगरीय निकायों के आसपास बसे ऐसे गांवों को शहरी क्षेत्र में शामिल करने की तैयारी की जा रही है, जहां शहर का विस्तार हो रहा है और भविष्य में बुनियादी सुविधाओं की जरूरत बढ़ने वाली है। इस प्रक्रिया के तहत पात्र गांवों की पहचान कर उन्हें संबंधित नगरीय निकाय में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

इस बदलाव के बाद इन क्षेत्रों में सड़क, पानी, नाली, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और दूसरी शहरी सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है। केंद्र सरकार की 16वें वित्त आयोग से जुड़ी व्यवस्था के तहत नए शामिल होने वाले क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य गांवों के शहरी क्षेत्र में शामिल होने के बाद वहां जरूरी व्यवस्थाएं विकसित करना और स्थानीय निकायों पर अचानक पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करना है।

कौन से गांव होंगे शहर में शामिल?

राज्य में एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगरीय निकायों के आसपास स्थित गांवों को इस प्रक्रिया के लिए प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा। हालांकि, हर गांव को सीधे शहर में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए उसकी स्थिति, शहर से जुड़ाव, शहरी विस्तार की जरूरत और प्रशासनिक उपयुक्तता जैसे पहलुओं का आकलन किया जाएगा।

राज्य स्तरीय समिति करेगी गांवों की पहचान

योजना को प्रदेश में लागू करने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने एक राज्य स्तरीय विभागीय समिति गठित की है। यही समिति पात्र नगरीय निकायों और उनके आसपास के गांवों का परीक्षण करेगी। समिति यह भी देखेगी कि किसी गांव का नगरीय निकाय में विलय प्रशासनिक और विकास के लिहाज से कितना उचित है।

2011 की जनगणना के आधार पर मिलेगा अनुदान

शहर में शामिल किए जाने वाले नए क्षेत्रों के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार माना जाएगा। योजना के तहत प्रति व्यक्ति 2,000 रुपये का एकमुश्त अनुदान मिलने का प्रावधान है। इस राशि का इस्तेमाल नए क्षेत्रों में जरूरी क्षमता और बुनियादी व्यवस्थाएं तैयार करने के लिए किया जा सकता है।

तीन साल की कार्ययोजना पर होगा फोकस

गांवों को नगरीय क्षेत्र में शामिल करने के बाद वहां सुविधाएं विकसित करने के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए तीन साल की कार्ययोजना बनाने पर जोर रहेगा। इसमें क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से सड़क, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं को विकसित करने का खाका तैयार किया जाएगा।

गांव से शहर बनने पर क्या बदलेगा?

अगर किसी गांव को नगरीय निकाय में शामिल किया जाता है तो वहां स्थानीय प्रशासन और विकास का ढांचा बदल सकता है। ग्रामीण क्षेत्र में मिलने वाली व्यवस्थाओं की जगह धीरे-धीरे शहरी निकाय के तहत सुविधाएं और सेवाएं विकसित की जाएंगी। इससे शहर से लगे गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम रूप से कौन-कौन से गांव शामिल होंगे, यह सरकार और संबंधित समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।

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