रायपुर। एक बार फिर लल्लूराम डॉट कॉम की खबर का बड़ा असर हुआ है। मंत्रालय बस अग्निकांड और बसों की कंडम स्थिति का खुलासा करने के बाद RTO ने मामले में संज्ञान लिया। आज RTO ने नगर निगम की बसों की भौतिक जांच में भारी गड़बड़ी पाई। यही बसें अधिकारी-कर्मचारियों की जान जोखिम में डालकर चलाई जा रही थी।
आरटीओ ने मंत्रालय और संचालनालय में संचालित 107 बसों की जांच की, जिसमें से 35 बसें अत्यंत कंडम स्थित में पाई गई। कम कंडम स्थिति में 62 बसें हैं। सिर्फ 10 बसें सही हालात में पाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ज्यादा सीट दिखाने के लिए इमरजेंसी गेट को बंद कर दिया गया है। आगे और पीछे दोनों गेटों में दो-दो सीटें लगा दी गई है, जो नियम के खिलाफ है। इस तरह एक बस में चार सीट बढ़ाई गई है। अगर कभी बस कभी हादसे की शिकार होती है तो अधिकारी-कर्मचारी इमरजेंसी दरवाजे का उपयोग नहीं कर पाएंगे, जिससे उनकी जान भी जा सकती है।
मिली जानकारी के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग NRDA को बसों का भुगतान करता है। फिर NRDA रायपुर नगर निगम को भुगतान करता है। इसके बाद नगर निगम ठेका कंपनी दुर्गम्बा बस सर्विस को भुगतान करता है। एक कर्मचारी के पीछे सामान्य प्रशासन विभाग 3060 रुपए का भुगतान कर रहा है। लगभग 5 हजार अधिकारी-कर्मचारी इन बसों से कार्यालय आते-जाते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि इसमें इतने सारे विभागों का जाल क्यों उलझाया गया है और आम जनता के लिए संचालित बस को किस नियम के तहत मंत्रालय और संचालनालय में नगर निगम ने लगाया है ?
इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव पुलक भट्टाचार्य ने कहा, बस में आग लगने के बाद RTO से बातचीत कर आज जांच कैंप का आयोजन किया गया। जांच में संचालित बसों में कई बड़ी खामियां पाई गई है। नियमानुसार आगे कार्रवाई होगी।
