Oplus_16908288

Oplus_16908288

रायपुर। बस्तर की पहचान लंबे समय तक नक्सल हिंसा और बंदूकों की छाया से जुड़ी रही है। लेकिन अब इसी बस्तर से बदलाव की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो उम्मीद जगाती है। कभी नक्सली संगठन से जुड़ी रहीं पूर्व महिला नक्सलियों ने रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में रैंप वॉक किया। हथकरघा से तैयार पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर कदम रखा तो दर्शकों ने तालियों से उनका स्वागत किया।

बंदूक छोड़कर नई जिंदगी की ओर कदम

पूर्व महिला नक्सलियों का यह रैंप वॉक सिर्फ एक फैशन प्रस्तुति नहीं था। यह उनके जीवन में आए बदलाव की कहानी भी सामने लाता है। हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के बाद ये महिलाएं अब सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पारंपरिक परिधानों और हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित किया। रैंप पर उनका आत्मविश्वास देखकर वहां मौजूद लोगों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।

हथकरघा बना नई पहचान का माध्यम

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम का उद्देश्य देश की पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प को बढ़ावा देना भी है। इसी मंच पर पूर्व महिला नक्सलियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को एक अलग संदेश दे दिया।

कभी जंगलों में हथियारों के साथ जिंदगी बिताने वाली इन महिलाओं ने अब हथकरघा से जुड़े परिधानों के जरिए अपनी नई पहचान प्रस्तुत की। यह बदलाव पुनर्वास के साथ कौशल और आत्मनिर्भरता के महत्व को भी रेखांकित करता है।

बस्तर में बदलाव की नई तस्वीर

नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा अभियानों के साथ मुख्यधारा में वापसी और पुनर्वास की प्रक्रिया भी जारी है। पूर्व नक्सलियों के सामान्य जीवन में लौटने की ऐसी तस्वीरें बस्तर में हो रहे सामाजिक बदलाव को सामने लाती हैं।

रायपुर का यह आयोजन इसी बदलाव की एक प्रतीकात्मक तस्वीर बनकर सामने आया, जहां कभी हथियार उठाने वाली महिलाएं अब मंच पर आत्मविश्वास के साथ नजर आईं।

VIDEO : रैंप पर पूर्व महिला नक्सलियों का आत्मविश्वास

▶ पूर्व महिला नक्सलियों का रैंप वॉक वीडियो देखें

स्थान : रायपुर, छत्तीसगढ़

इनपुट : ANI


Spread the word
R.O. No. 13952/23